गया में सुगम हुआ सफर,तीन प्रखंडों को जोड़ने वाला पुल बना हजारों ग्रामीणों का सहारा

गया जिले के मोहनपुर, फतेहपुर और टनकुप्पा प्रंखंडवासियों के लिए सफर और भी सुगम हो गया है. तीनों प्रखंडों को जोड़ने वाला पुल का निर्माण कार्य पूरा हो गया है, जिससे हजारों ग्रामीणों को सहारा मिलेगा.

Gaya News: (संदीप कुमार रिपोर्ट) गया जिले के मोहनपुर, फतेहपुर और टनकुप्पा प्रखंड के हजारों ग्रामीणों के लिए खुशियों की नई राह खुल गई है. लखैयपुर के समीप नेताने नदी पर लंबे समय से प्रतीक्षित पुल का निर्माण कार्य पूरा होने से न केवल आवागमन सुगम हुआ है बल्कि तीन प्रखंडों के बीच की दूरियां भी सिमट गई हैं. स्थानीय विधायक ज्योति देवी के प्रयासों से साकार हुए इस प्रोजेक्ट ने ग्रामीणों को बरसात के दिनों में होने वाली नारकीय स्थिति से मुक्ति दिला दी है.

70 किमी का सफर अब 15 किमी में सिमटा

पुल निर्माण से पूर्व अमकोला, मुसैला और अंबातरी पंचायत के लोगों को जिला मुख्यालय जाने के लिए बाराचट्टी होकर NH-19 का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था. बरसात के मौसम में नदी पार करना नामुमकिन होने के कारण लोगों को करीब 60 से 70 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी. अब यह दूरी घटकर मोहनपुर से फतेहपुर के लिए महज 12 किमी और टनकुप्पा के लिए 15 किमी रह गई है.

पहाड़पुर रेलवे स्टेशन और जिला मुख्यालय तक पहुंच हुई आसान

इस पुल के चालू होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आया है, किसानों के लिए अब अपनी उपज बाजारों तक पहुँचाना अब सस्ता और तेज हो गया है. वहीं छात्रों को कॉलेज जाने और मरीजों को अस्पताल ले जाने में लगने वाला समय भी काफी कम हो गया है. साथ ही पहाड़पुर रेलवे स्टेशन तक पहुँचने के लिए अब ग्रामीणों को जोखिम भरा रास्ता नहीं चुनना पड़ता.

इन गांवों की बदली सूरत

पुल बनने से पथरा, जोगिया, जोगनी, मंझौली, लेमबोचक, लखैयपुर, मोहनपुर और नावाडीह समेत दर्जनों गांवों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो गया है. स्थानीय निवासी सुनील कुमार सिंह और रविंद्र सिंह ने बताया कि बरसात में नदी पार करना जान जोखिम में डालने जैसा था, लेकिन अब पुल के निर्माण ने इसे सुरक्षित सफर में बदल दिया है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

लखैयपुर बाजार के व्यवसायी राजकुमार प्रसाद केसरी का मानना है कि सड़क संपर्क बेहतर होने से ग्रामीण बाजारों में रौनक बढ़ेगी. बेहतर ट्रांसपोर्टेशन की वजह से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आमदनी के अवसर बढ़ेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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