इस्लाम धर्म के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के यौमे पैदाइश के मौके पर बुधवार को गया में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया. मदीना मस्जिद कर्बला से निकला जुलूस शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए खानकाह मोनामिया चिश्तिया पहुंचा. इस दौरान पूरा शहर नात-ओ-सलाम से गूंजता रहा और लोगों ने जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया.
अमन और भाईचारे के लिए की गयी दुआ
जुलूस शुरू होने से पहले कर्बला के खादिम डॉ. सैयद शाह शब्बीर आलम कादरी ने चादरपोशी की. इस दौरान दुनिया में अमन, शांति, भाईचारा और मोहब्बत कायम रहने के लिए दुआ मांगी गयी. इसके बाद जुलूस-ए-मोहम्मदी को रवाना किया गया.
शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा जुलूस
जुलूस मदीना मस्जिद कर्बला से निकलकर पंचायती अखाड़ा, किरानी घाट, जामा मस्जिद, चौक, केपी रोड, छोटी मस्जिद, जीबी रोड, पीरमंसूर, नादरगंज और टिल्हा धर्मशाला होते हुए खानकाह मोनामिया चिश्तिया पहुंचा. यहां लोगों को तबर्रुकात की जियारत करायी गयी.
नात-ओ-सलाम से गूंजता रहा गया शहर
जुलूस में शामिल लोग पूरे रास्ते दरूद शरीफ पढ़ते रहे. जगह-जगह नात-ओ-सलाम की आवाज सुनाई देती रही. जुलूस के दौरान धार्मिक उत्साह और आपसी भाईचारे का माहौल देखने को मिला.
गुलाब के फूल और शरबत से हुआ स्वागत
जुलूस के रास्ते में स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए गुलाब के फूल, शरबत, जूस, बिस्किट और मिठाई के स्टॉल लगाये. लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों के बीच खाद्य सामग्री और पेय पदार्थ तकसीम किये. इस दौरान पूरे मार्ग पर लोगों की भीड़ जुटी रही.
खानकाह पहुंचकर कराया गया तबर्रुकात का जियारत
जुलूस के खानकाह मोनामिया चिश्तिया पहुंचने के बाद तबर्रुकात का जियारत कराया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. जुलूस के दौरान अमन, शांति और भाईचारे का संदेश दिया गया.
