पितृपक्ष में गया जी आने से पहले जान लें पूरा प्लान, ट्रेन से ट्रैफिक तक श्रद्धालुओं के लिए क्या है व्यवस्था

पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान गया आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं. 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस महासंगम के लिए ट्रैफिक डायवर्जन, ट्रेन विकल्पों, ऑनलाइन ई-पिंडदान, सुरक्षा के लिए ड्रोन-सीसीटीवी निगरानी और हर घंटे सफाई मॉनिटरिंग जैसी पुख्ता व्यवस्थाएं की गई हैं.

Pitru Paksha Gaya 2026 : पितृपक्ष में गया जी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार कई स्तरों पर तैयारी की गई है. 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.

भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर जिम्मेदारियां तय की हैं. मेला की अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए 21 टीमें बनाई गई हैं.

श्रद्धालुओं के गया पहुंचने से लेकर पिंडदान स्थलों तक जाने, वाहन पार्क करने, भीड़ और ट्रैफिक संभालने, सुरक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, पेयजल और रोशनी तक की व्यवस्था पर प्रशासन ने तैयारी की है. रेलवे से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई शहरों से ट्रेन विकल्प हैं, जबकि सड़क मार्ग से आने वालों के लिए भी ट्रैफिक और पार्किंग की व्यवस्था तय की जा रही है.

25 सितंबर से बदलेगी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था

पितृपक्ष मेला के दौरान जाम और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 25 सितंबर से नई यातायात व्यवस्था लागू होगी. सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक अनुमति वाले वाहनों और निर्धारित बसों को छोड़कर बड़े वाहनों की शहर में एंट्री बंद रहेगी. बड़े व्यावसायिक वाहन और ट्रक रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक वैकल्पिक मार्गों से गुजर सकेंगे.

सांकेतिक तस्वीर

प्रशासन ने श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से निर्धारित रूट, पार्किंग और किराया व्यवस्था का पालन करने की अपील की है.

ट्रेन से आने वालों के लिए कई विकल्प

दिल्ली और नई दिल्ली से गया आने वाले यात्रियों के लिए कई प्रमुख ट्रेनें उपलब्ध हैं. 12301 हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस गया जी से नई दिल्ली की दिशा में चलती है. 12313 सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस भी गया-दिल्ली रेल कनेक्शन का विकल्प है.

हावड़ा और कोलकाता क्षेत्र से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 12307 हावड़ा-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस और 12311 नेताजी एक्सप्रेस जैसे विकल्प हैं. मौजूदा समय-सारिणी के अनुसार 12307 हावड़ा-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस करीब सुबह 6:25 बजे गया जंक्शन पहुंचती है और 6:30 बजे आगे के लिए रवाना होती है.

ट्रेन की सांकेतिक तस्वीर

पटना से गया जी आने वालों के लिए 12365 रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस, 22349 पटना-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस, 13243 इंटरसिटी एक्सप्रेस, 13350 पटना-सिंगरौली एक्सप्रेस और 13348 पलामू एक्सप्रेस जैसे विकल्प हैं.

वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार सीधी ट्रेन या पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के रास्ते उपलब्ध कनेक्शन की जानकारी देखनी होगी. पितृपक्ष के दौरान ट्रेनों के ठहराव और परिचालन में बदलाव संभव होने के कारण टिकट बुक करते समय अपडेटेड शेड्यूल देखना जरूरी होगा.

गया जंक्शन से विष्णुपद तक ऐसे पहुंचें

गया जंक्शन पहुंचने के बाद श्रद्धालु ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहनों से विष्णुपद मंदिर और पिंडदान स्थलों तक पहुंच सकते हैं. मेला के दौरान शहर में भारी भीड़ रहने की संभावना को देखते हुए स्टेशन से आगे की यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलना होगा.

पिंडदान के लिए पर्यटन विभाग के पैकेज भी

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बिहार पर्यटन विभाग ने पिंडदान पैकेज जारी किए हैं. इनमें यात्रा, पिंडदान, पूजन सामग्री, भोजन और ठहरने जैसी सुविधाएं शामिल हैं. श्रद्धालु अपनी जरूरत के अनुसार एक दिन या एक रात-दो दिन का पैकेज चुन सकते हैं.

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कुछ पैकेज में पटना से पिकअप-ड्रॉप, जबकि कुछ में गया रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप-ड्रॉप की सुविधा है. फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की सुविधा पैकेज में शामिल है. कुछ पैकेज में पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा की सैर भी कराई जाएगी.

पिंडदान पैकेज की बुकिंग बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के माध्यम से ऑनलाइन की जा सकती है. पैकेज और बुकिंग से जुड़ी जानकारी के लिए 8544418408 और 8294307690 पर संपर्क किया जा सकता है.

गया जी नहीं आ सकते तो ऑनलाइन ई-पिंडदान

जो श्रद्धालु किसी कारण गया जी नहीं पहुंच सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी है. इसमें विष्णुपद, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पिंडदान या तर्पण की व्यवस्था होगी. पंडित-पुरोहित की सेवा, पूजन सामग्री और दक्षिणा भी पैकेज में शामिल है.

पूरे अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराकर श्रद्धालु को पेन ड्राइव में उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. ई-पिंडदान पैकेज की कीमत 23 हजार रुपये, जीएसटी समेत बतायी गयी है.

सुरक्षा के लिए CCTV और ड्रोन से निगरानी

मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के लिए अस्थायी CCTV कैमरे और ड्रोन कैमरे लगाने की योजना है. प्रमुख स्थानों पर पुलिस शिविर बनाए जाएंगे. दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती के साथ महिला और पुरुष पुलिस बल की भी व्यवस्था होगी.

ड्रोन की तस्वीर

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पिंडदान के प्रमुख स्थलों पर भी सुरक्षा को लेकर विशेष तैयारी है. वैतरणी सरोवर में पानी की गहराई को देखते हुए बैरिकेडिंग और लाल झंडे लगाने के निर्देश दिए गए हैं. सरोवर की सफाई, सीढ़ियों से काई हटाने और क्षतिग्रस्त टाइलों की मरम्मत के निर्देश भी दिए गए हैं.

मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर और एंबुलेंस

श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे. यहां चिकित्सक और पैरामेडिकल कर्मी मौजूद रहेंगे. जरूरी दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रखने के साथ एंबुलेंस की व्यवस्था होगी. गंभीर स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था रहेगी.

सांकेतिक तस्वीर

हर जोन में हर घंटे होगी सफाई की निगरानी

मेला क्षेत्र को अलग-अलग जोन में बांटकर सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी तय की गयी है. प्रत्येक जोन में हर घंटे सफाई व्यवस्था की निगरानी का निर्देश है. अधिकारी खुद क्षेत्र में जाकर व्यवस्था का जायजा लेंगे.

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मेला अवधि में औचक निरीक्षण भी होगा. गंदगी या सफाई में लापरवाही मिलने पर संबंधित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है. सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए अटेंडेंस चार्ट और विजिट चार्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है.

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घाटों से लेकर शौचालय तक विशेष सफाई

मेला क्षेत्र में सफाई का काम आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराया जा रहा है. प्रमुख घाटों, तालाबों और सार्वजनिक शौचालयों की विशेष सफाई के साथ रंग-रोगन कराया गया है. नालियों और सड़कों को दुरुस्त करने की जानकारी दी गयी है.

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई स्थानों पर वाटर एटीएम लगाए गए हैं. मेला क्षेत्र में हाइमास्ट, मिनी हाइमास्ट, स्ट्रीट लाइट और रोप लाइट से रोशनी की व्यवस्था की गयी है. फल्गु नदी के तट पर लेजर लाइट शो भी कराया जाएगा.

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लेखक के बारे में

By सूर्यकांत कुमार

सूर्यकांत कुमार तीन वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. स्थानीय और हाइपरलोकल पत्रकारिता में विशेष अनुभव रखते हैं. कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर का भी व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक डिजिटल न्यूज चैनल से की और विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करते हुए समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया है. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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