डीडीयू मंडल ने बनाया नया रिकॉर्ड, जुलाई में 10.63 ट्रैक किमी स्लीपर बदलकर देश में दूसरा स्थान

पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मंडल ने रेल संरक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. जुलाई 2026 में, अत्याधुनिक ट्रैक रिलेइंग ट्रेन (टीआरटी) मशीन का उपयोग करके 10.63 ट्रैक किलोमीटर तक पुराने स्लीपरों का सफलतापूर्वक नवीनीकरण किया गया. यह उपलब्धि भारतीय रेल में जुलाई माह के दौरान दूसरा सर्वोच्च प्रदर्शन रही.

पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मंडल ने रेल संरक्षा और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है. इंजीनियरिंग विभाग ने जुलाई 2026 के दौरान अत्याधुनिक ट्रैक रिलेइंग ट्रेन (टीआरटी) मशीन की सहायता से 10.63 ट्रैक किलोमीटर तक पुराने एवं जर्जर स्लीपरों का सफलतापूर्वक नवीनीकरण कर डीडीयू मंडल के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन दर्ज किया है.

यह उपलब्धि न केवल मंडल के लिए एक नया कीर्तिमान है, बल्कि पूरे भारतीय रेल में जुलाई माह के दौरान दूसरा सर्वोच्च प्रदर्शन भी रही. इस सूची में केवल सिकंदराबाद मंडल ही डीडीयू से आगे रहा. यह रिकॉर्ड प्रदर्शन मंडल के अत्यंत व्यस्त ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड पर किया गया, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों का परिचालन होता है.

रेलवे ट्रैक. सांकेतिक तस्वीर. (AI Image)

ऐसे महत्वपूर्ण रेलखंड पर पुराने स्लीपरों को समयबद्ध तरीके से बदलना एक चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है. इंजीनियरिंग विभाग ने सुनियोजित कार्ययोजना और आधुनिक तकनीक के उपयोग से इस चुनौती को सफलता में बदल दिया.

टीआरटी मशीन से बढ़ी गुणवत्ता और कार्यक्षमता

ट्रैक रिलेइंग ट्रेन (TRT) मशीन पूर्णतः यंत्रीकृत एवं अत्याधुनिक तकनीक से लैस है. इसके माध्यम से पुराने स्लीपरों को हटाकर नये स्लीपर अत्यंत सटीकता और गुणवत्ता के साथ लगाए जाते हैं. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मशीन के उपयोग से कार्य की गति बढ़ने के साथ-साथ मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होती है.

इससे ट्रैक की मजबूती, विश्वसनीयता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार आता है तथा भविष्य में अनुरक्षण कार्य भी अधिक व्यवस्थित ढंग से किए जा सकते हैं. रेल अधिकारियों के अनुसार, ट्रैक रिलेइंग कार्य का सीधा संबंध रेल संरक्षा और समय पालन से होता है. पुराने एवं सेवा अवधि पूर्ण कर चुके स्लीपरों के स्थान पर नये स्लीपर लगाए जाने से ट्रैक की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनता है.

इसके अलावा ट्रैक अनुरक्षण की आवश्यकता भी कम होती है, जिससे परिचालन में व्यवधान घटता है और यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलती है.

डीआरएम और वरिष्ठ अधिकारियों ने की टीम की सराहना

डीडीयू मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) उदय सिंह मीना ने इस उपलब्धि पर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि रेल पथ भारतीय रेल परिचालन की आधारशिला है. इसका वैज्ञानिक अनुरक्षण और समयबद्ध रिलेइंग सुरक्षित, निर्बाध तथा समयनिष्ठ रेल संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक है.

ट्रैक पर खड़ी ट्रेन ( स्रोत – सोशल मीडिया )

उन्होंने कहा कि आधुनिक यंत्रीकृत तकनीक के प्रभावी उपयोग से प्राप्त यह सफलता डीडीयू मंडल की तकनीकी दक्षता, संरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट रेल अवसंरचना विकसित करने की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रमाण है.

इधर, वरिष्ठ मंडल अभियंता (समन्वय) स्वाति राज ने कहा कि टीआरटी मशीन के माध्यम से ट्रैक रिलेइंग कार्यों में उच्च स्तर की सटीकता, गुणवत्ता और दक्षता सुनिश्चित होती है. उन्होंने इस सफलता का श्रेय इंजीनियरिंग विभाग की पूरी टीम के समन्वित प्रयास, बेहतर कार्य योजना और कर्मचारियों के समर्पण को दिया.

Also Read : गया जी में निगमकर्मियों की हड़ताल से बढ़ा संकट, शहर में कचरे का अंबार; जलापूर्ति बाधित होने पर DM ने दिए FIR के निर्देश


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rohit kumar singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >