CUSB की शोधार्थी मेघा कुमारी को ACS का सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मिला सम्मान

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के केमिस्ट्री विभाग की शोधार्थी मेघा कुमारी को वेल्लोर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ICMES 2026 के दौरान अमेरिकन केमिकल सोसायटी (ACS) की तरफ से सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रेजेंटेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उनके इस शोध से औषधीय रसायन के क्षेत्र में नए रास्ते खुलेंगे.

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री) विभाग की प्रतिभाशाली शोधार्थी मेघा कुमारी ने एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है. उन्हें प्रतिष्ठित 'अमेरिकन केमिकल सोसायटी' (ACS) की ओर से सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुतीकरण (बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन) पुरस्कार से नवाजा गया है.

यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित पुरस्कार वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT), वेल्लोर द्वारा हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'पदार्थ, ऊर्जा एवं सततता सम्मेलन' (ICMES 2026) के दौरान प्रदान किया गया है. मेघा कुमारी वर्तमान में सीयूएसबी के केमिस्ट्री विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. महेंद्र खत्रावत के कुशल निर्देशन में अपना शोध कार्य आगे बढ़ा रही हैं.

ऑक्सीडेटिव एनुलेशन पर आधारित शोध को मिला यह सम्मान

मेघा कुमारी को यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके महत्वपूर्ण शोध कार्य ''पीआइडीए द्वारा प्रवर्तित ऑक्सीडेटिव एनुलेशन के माध्यम से क्विनॉक्सालिन व्युत्पन्नों का प्रभावी संश्लेषण'' विषय पर प्रस्तुत किए गए उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया गया है.

उनकी इस बड़ी सफलता पर दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अतुल प्रताप सिंह तथा उनके शोध पर्यवेक्षक डॉ. महेंद्र खत्रावत ने मेघा कुमारी को हार्दिक बधाई दी है. साथ ही, वैज्ञानिकों ने अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी गहरी लगन, कठिन परिश्रम और प्रतिबद्धता की भरपूर सराहना की है.

विश्वविद्यालय के दिग्गजों ने उन्हें कार्बनिक संश्लेषण तथा औषधीय महत्व वाले विषमचक्रीय रसायन के क्षेत्र में भविष्य में भी ऐसे ही नवीन एवं उपयोगी शोध कार्य जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया.

औषधीय विज्ञान के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण है यह शोध

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क कार्यालय (PRO) द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के अनुसार, मेघा का यह शोध क्विनॉक्सालिन व्युत्पन्नों के निर्माण के लिए अत्यधिक प्रभावी और उन्नत संश्लेषण विधियों के विकास पर पूरी तरह केंद्रित है.

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आपको बता दें कि क्विनॉक्सालिन नाइट्रोजन युक्त विषमचक्रीय यौगिकों का एक बेहद महत्वपूर्ण वर्ग है, जिसका औषधीय विज्ञान और भेषज रसायन (फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री) के क्षेत्र में बहुत बड़ा और उपयोगी योगदान माना जाता है.

इस उपलब्धि के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए शोध निर्देशक डॉ. महेंद्र खत्रावत ने बताया कि रसायन विज्ञान के क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए समर्पित दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिक संस्थानों में शुमार अमेरिकन केमिकल सोसायटी (ACS) द्वारा यह सम्मान मिलना विश्वविद्यालय और पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है.

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By कलेंद्र प्रताप सिंह

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