1944 में कॉलेज की स्थापना को लेकर लाला गुरुशरण लाल, अधिवक्ता धनेश प्रसाद, राय बलवीर प्रसाद, राय बागेश्वरी प्रसाद, ख्वाजा मिद्दत नूर व श्रीकृष्ण भदानी जैसे समाजसेवियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. यह जान कर खुशी हुई कि यह बिहार का पहला कॉलेज है, जहां 19 हजार स्टूडेंट्स हैं. ऐसे आयोजनों से आनेवाली पीढ़ियों को कॉलेज के इतिहास से रू-ब-रू होने का मौका मिलता है. डॉ कुमार ने कहा कि 21 लाख रुपये की लागत से गोवर्द्धन दास डालमिया पार्क बनाया जायेगा और पुस्तकालय को भी लाखों की लागत से सुदृढ़ किया जायेगा.
उस समय एल्केम नामक दवा कंपनी से संबंधित कुछ लोग आये थे, उन्हें व्यावसायिक दृष्टिकोण से संपदा बाबू की जिंदगी से संबंधित फिल्म बनानी थी. वे लोग उन स्थानों का जायजा लिया और शूटिंग की, जहां संप्रदा बाबू क्लास किया करते थे. ऐसा गौरवमयी इतिहास रहा है इस कॉलेज का. उन्होंने कहा कि 1994 में गया कॉलेज में स्वर्ण जयंती समारोह मनाया गया था. उस समारोह में ऐसी भीड़ उमड़ी थी कि परिसर में पैर रखने के लिए जगह नहीं थी. लोगों ने छतों पर चढ़ कर समारोह का आनंद लिया था. लेकिन, एक वर्षों पुरानी घटना भी है. जब कार्ल मार्क्स के निधन के बाद शोक सभा का आयोजन किया गया था तो उसमें सिर्फ 11 लोग शरीक हुए थे. उस समय एक विद्वान ने कहा था कि आज भले ही कार्ल मार्क्स को लोग याद नहीं कर रहे हैं. लेकिन, भविष्य में कार्ल मार्क्स याद किये जायेंगे. उन्होंने कहा कि 2019 में गया कॉलेज 75 साल का हो जायेगा. उस समारोह में ऐसी भीड़ उमड़े कि एकता भवन भी छोटा पड़ जाये.
