सात जुलाई 2013 के बाद बोधगया में कुछ महीने तक चौकसी देखते बनती थी, पर फिलवक्त महाबोधि मंदिर से दूर बौद्ध मठों व होटल क्षेत्रों के साथ ही आवासीय इलाकों में सुरक्षा की लचर व्यवस्था देखने को मिलने लगी है. हालांकि, इस बारे में बौद्ध मठों के प्रभारियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश का अनुपालन करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए बोधगया के आसपास के मुहल्लों व गांवों में स्थित बौद्ध मठों की ओर पैट्रोलिंग बढ़ाने की जरूरत है. बोधगया की सुरक्षा के बारे में एसएसपी गरिमा मलिक ने बताया कि पहले लिये गये निर्णयों पर काम जारी है. पहले की तुलना में सुरक्षा-व्यवस्था और कड़ी की गयी है. विभिन्न बिंदुओं पर काम करने का प्रयास जारी है.
महाबोधि मंदिर तक ही सिमट कर रह गयी सुरक्षा व्यवस्था
गया: बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर के साथ ही 80 फुट बुद्ध मूर्ति, तेरगर मोनास्टरी व अन्य स्थानों पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के तीन साल आगामी सात जुलाई को पूरे हो जायेंगे. एक बार फिर से पूरी दुनिया को शांति व भाईचारे का संदेश देनेवाले बोधगया (महाबोधि मंदिर)में हुए बम धमाकों की याद ताजा […]

गया: बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर के साथ ही 80 फुट बुद्ध मूर्ति, तेरगर मोनास्टरी व अन्य स्थानों पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के तीन साल आगामी सात जुलाई को पूरे हो जायेंगे. एक बार फिर से पूरी दुनिया को शांति व भाईचारे का संदेश देनेवाले बोधगया (महाबोधि मंदिर)में हुए बम धमाकों की याद ताजा हो जायेगी. यहां की सुरक्षा-व्यवस्था में तब के मुकाबले हुए बदलाव दिख तो रहे हैं, पर यह सिर्फ महाबोधि मंदिर परिसर तक ही.
बोधगया के अन्य बौद्ध मोनास्टरी व मंदिरों की सुरक्षा को लेकर उस वक्त लिये गये निर्णय को अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है. सभी बौद्ध मठों में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्डों के साथ ही बौद्ध मठों में प्रवास करनेवालों व कर्मचारियों की जानकारी से पुलिस को अवगत कराने से लेकर मंदिर क्षेत्रों में पैदल पैट्रोलिंग कराने की नीति पर काम की गति काफी सुस्त है.