कंचन
गया : गया शहर स्थित अॉफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) ने शनिवार को 138 नये सैन्य अधिकारियों को देश की सेवा में समर्पित किया. नौवें पासिंगआउट परेड समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आर्मी चीफ जनरल दलवीर सिंह सुहाग (परम विशष्टि सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशष्टि सेवा मेडल, विशष्टि सेवा मेडल व एडीसी) के सामने 138 सैन्य अधिकारी पास आउट हुए. इनमें 46 जेंटलमैन कैडेट्स स्पेशल कमीशंड अॉफिसर (एससीओ) व 92 जेंटलमैन कैडेट्स टेक्निकल इंट्री स्कीम (टीइएस) सैन्य अधिकारी बने. यानी, 46 लेफ्टिनेंट हो गये और बाकी 92 इंजीनियर तैयार हुए. पासआउट होनेवाले कैडेट्स में दो भूटान के भी हैं.
इनके अलावा 53 जेंटलमैन कैडेट्स एक साल का प्रशिक्षण प्राप्त कर अब सिकंदराबाद, मऊ व पुणे स्थित मिलिटरी इंजीनियरिंग कॉलेज में तीन साल की ट्रेनिंग लेंगे. वहां से ट्रेनिंग लेकर फिर एक माह के लिए गया ओटीए लौटेंगे और यहां से पासआउट होकर अफसर बनेंगे.
इस मौके पर सेना प्रमुख ने कहा कि यहां से जो पासआउट होते हैं, वे कहीं भी ऑपरेशन में शामिल हो सकते हैं. नॉर्थ-इस्ट, जम्मू-कश्मीर व रेगस्तिान, कहीं भी. इस तरह के ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि 42 साल पहले एनडीए कैडेट्स के रूप में सेना ज्वाइन की थी. एक ऑफिसर के रूप में मुख्य कर्तव्य होता है, नेतृत्व देना. सेना में बातों से ज्यादा एक्शन काम करता है.
सैन्य अधिकारियों व जवानों की क्षमता व कार्यशैली का परीक्षण विकट व चुनौतीपूर्ण परस्थितिियों के अनुसार ही होता है. जवान सेना के अधिकारियों के लिए पूंजी हैं. यह सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है कि विशेष परिस्थितियाें में अधिकारी उनका कैसे इस्तेमाल करते हैं.
वैश्विक चुनौतियों के लिए रहें तैयार : सेना प्रमुख ने पासआउट होनेवाले कैडेट्स के अभिभावकों को भी धन्यवाद दिया. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे देश की सेवा के लिए बच्चों को तैयार करें. एकेडमी ने कैडेट्स को अच्छे सैन्य अधिकारियों
के रूप में तैयार किया है, अब वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार रखें. उन्होंने पासआउट सैन्य अधिकारियों के उज्ज्वल भवष्यि की कामना की. इसके साथ ही कहा कि किसी भी देश के विकास व समृद्धि इस बात पर नर्भिर करते हैं कि उसकी सीमाएं कितनी सुरक्षित हैं. उसकी आंतरिक सुरक्षा कितनी स्थिर है. राष्ट्रीय सुरक्षा में सेना की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है.
प्राकृतिक आपदा या अन्य विपत्ति में लोग सेना पर ही भरोसा करते हैं. जनरल सुहाग ने कहा कि भारत का सैन्य प्रशिक्षण अन्य कई देशों की तुलना में बेहतर है. ऐसे में जवानों-अफसरों का कर्तव्य है कि राष्ट्र के भरोसे पर खरे उतरें और भारतीय सेना का परचम ऊंचा रखें.
भूटान के सैनिक भारत व भूटान के बीच की कड़ी : इससे पहले परेड की सलामी, निरीक्षण व मार्च पास्ट के बाद पासिंगआउट परेड के निरीक्षण अधिकारी सेना प्रमुख ने कहा कि भूटान आर्मी से हमारा खास संबंध रहा है. भूटान के सैनिक भारत व भूटान के बीच की कड़ी रहे हैं. उन्होंने ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स के व्यवहार व प्रशिक्षण की सराहना की.
