गया: शहर में मच्छरों का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. शाम की कौन पूछे मच्छरों ने दिन का भी शिफ्ट अपना लिया है. इनसे बचने के लिए लोग-बाग अपने स्तर से उपाय कर रहे हैं, लेकिन निगम की तरफ से कोई उपाय नहीं किया जा रहा है. स्थिति तो यह है कि शहर में फॉगिंग की बात तो दूर, नियमित साफ-सफाई पर भी जोर नहीं है. इससे शहरवासियों में असंतोष है.
कई इलाकों में ओवरफ्लो कर रहे नाले : शहर के कई मुहल्ले ऐसे हैं, जहां नाले ओवरफ्लो कर रहे हैं. लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल होता है. इन इलाकों में तो मच्छरों के लिए रामराज्य है.
दंडीबाग के राजकुमार नगर व ललितनगर में नाली निर्माण अधूरा छोड़ दिये जाने के चलते गलियों में नाली का पानी जमा हो गया है. ज्यादा दिन से पानी जमा होने के कारण उसमें से दुर्गंध आने लगा है.
शहर में फॉगिंग की रफ्तार काफी धीमी, क्योंकि : तीन साल पहले खरीदी गयी तीन फॉगिंग मशीनें यों ही खराब पड़ी हैं. दो छोटी मशीनों के सहारे 53 वार्डों में रोस्टरवाइज फॉगिंग की घोषणा की गयी है. इनके सहारे पूरे शहर को कवर करना मुश्किल हो रहा है.
मशीन खरीद में भी घोटाला !
2013 में नौ लाख प्रति मशीन की लागत से फॉगिंग मशीनें खरीदी गयीं. ये मशीनें खराब पड़ी हैं. वार्ड पार्षद लालजी प्रसाद ने खरीद में भुगतान किये गये रुपये पर भी सवाल उठाया गये हैं. उनका आरोप है कि मशीन की खरीद में हेराफेरी की गयी है. इसकी शिकायत निगरानी विभाग में की गयी है. उनका सीधा आरोप है कि जिस मशीन की कीमत मार्केट में ढाई लाख है, उसके लिए नौ लाख का भुगतान किया गया. उनका कहना है कि निगरानी इस बाबत जांच कर रही है.
