डॉक्टरी सलाह . मस्तिष्क से जुड़ीं बीमारियां गंभीर, भारी पड़ सकती है लापरवाही
गया : देश में करीब 2500 न्यूरोलॉजिस्ट हैं और लगभग 2000 न्यूरो सर्जन. देश की 125 करोड़ की आबादी की तुलना में यह बेहद कम है. देश के कई शहरों में न्यूरो के इलाज का इंतजाम है ही नहीं, जबकि इसके मरीजों की संख्या अच्छीखासी है.
हर शहर में अभी न्यूरो इलाज के इंतजाम हो भी नहीं सकते. उक्त बातें गुड़गांव मेदांता अस्पताल के चेयरमैन डाॅ एएन झा ने कहीं. डाॅ झा रविवार को आइएमए हाॅल में लॉयंस क्लब व आइएमए की ओर आयोजित जेरियाट्रिक क्लीनिक में न्यूरो के मरीजों को परामर्श देंगे. शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में डॉ झा ने बताया कि देश में अभी टेलीकाॅम में बड़े बदलाव हो रहे है. इसे एक तरह का रिवाॅल्यूशन कहा जा सकता है. एक दूसरे से अब हम बड़ी आसानी से जुड़ सकते हैं. इसका प्रयोग न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में क्यों नहीं किया जा सकता है?
डाॅ झा ने बताया कि वह आइएमए के सदस्यों के साथ इस मामले में चर्चा करेंगे. यहां के डाॅक्टर वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग (वीसी) की मदद से न्यूरो के मरीजों को दिये जानेवाले उपचार की जानकारी आसानी से ले सकेंगे. इससे मरीजों को भी सुविधा होगी. यह प्रयास केवल गया में नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिले व देश के अन्य शहरों में भी किया जायेगा. उन्होंने बताया कि सप्ताह में एक बार सभी डाॅक्टर एक साथ वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग की मदद से सेमिनार भी कर सकेंगे.
व्यस्तता के कारण मानसिक तनाव : शनिवार की शाम प्रेसवार्ता के बाद डाॅ एएन झा ने आइएमए के सदस्यों के साथ बैठक की. इस बैठक में उन्होंने कहा मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां जैसे गंभीर सिर दर्द, माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन हैमरेज व इपिलिप्सी के बारे में सही जानकारी नहीं होने की वजह से मरीज उचित इलाज से वंचित रह जाता है. आज के दौर में महानगर में रहनेवाले लोग अति व्यस्तता के कारण मानसिक तनाव व अवसाद के शिकार हो जाते हैं. डाॅ झा ने कहा कि सिर दर्द, चक्कर आना व आंखों के सामने अंधेरा छाने जैसी बीमारियों को नजरअंदाज करना गलत होगा.
ब्रेन ट्यूमर के मामले अधिक : डाॅ झा ने बताया कि आजकल ब्रेन ट्यूमर के मामले अधिक आ रहे हैं.लेकिन, अब तक कारणों का पता नहीं चल पाया है. पर, अब इस तरह के मामले जल्दी पहचान में आ जा रहे हैं. पहले मेडिकल में तकनीक नहीं थी. अब सीटी स्कैन व एमआरआइ समय पर कराने पर रोग का पता चल जाता है. डाॅ झा ने कहा कि पहले ये जांच बड़े-बड़े शहरों में ही सीमित थे. पर, अब इनका विस्तार हुआ है. यही कारण है कि जो बीमारी पहले विकराल रूप लेने के बाद पता चलती थी, वह अब एक छोटे से टेस्ट से पता चल जाती है.
