बोधगया : मगध विश्वविद्यालय (एमयू) के डॉ राधाकृष्णन सभागार-डीडीइ के सभागार में बुधवार को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्ययन परिषद (नैक) की ग्रेडिंग के प्रति महाविद्यालयों के प्राचार्यों के प्रशिक्षण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसमें प्राचार्यों से राष्ट्रीय स्तर पर अपने शैक्षणिक संस्थानों को विकसित करते हुए नैक ग्रेडिंग के प्रति गंभीर होने को कहा गया.
कार्यशाला का उद्घाटन एमयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ इसराइल खां, रजिस्ट्रार डॉ सीताराम सिंह, सीसीडीसी (समन्वयक, कॉलेज विकास परिषद) डॉ उपेंद्र प्रसाद वर्मा, औरंगाबाद स्थित एस सिन्हा कॉलेज ओमप्रकाश सिंह व डीडीइ के सहायक प्रोफेसर डॉ धनंजय धीरज ने दीप जला कर किया.
समारोह में मौजूद एमयू के अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्यों से पूर्व डीन (मैनेजमेंट स्टडीज, एमयू) प्रो सुधारंजन सिंह ने नैक ग्रेडिंग के प्रति अपने अनुभवों को शेयर करते हुए कहा कि पहली बार गया कॉलेज की नैक से ग्रेडिंग के दौरान वह गया कॉलेज के को-ऑडिनेटर (नैक) थे.
नैक से ग्रेडिंग का मामला उनके सामने बिल्कुल नया था. इसके बावजूद बेहतर प्रयास किया गया और गया कॉलेज नैक की ग्रेडिंग में बेहतर परफॉर्मेंस किया. नैक ग्रेडिंग के लिए संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा तैयार की जानेवाली सेल्फ स्टडी रिपोर्ट (एसएसआर) में उन्हीं बातों को रेकॉर्ड करें, जो धरातल पर हैं.
ऐसा नहीं होने से नैक टीम पर निगेटिव असर पड़ता है. यह शैक्षणिक संस्थान के लिए और निगेटिव हो जाता है. प्रो सिंह ने शैक्षणिक संस्थानों में इंटरनेट फैसिलिटी व इक्को फ्रेंडली माहौल बनाये रखने पर जोर दिया और कहा कि इनसे नैक टीम पर विशेष प्रभाव पड़ता है.
