गया: बिहार चिकित्सा व जन-स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला शाखा के शिष्टमंडल व सिविल सर्जन डॉ कृष्ण मोहन पूर्वे के बीच शुक्रवार को बातचीत हुई. इसके बाद सर्वसम्मति से आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया गया. उल्लेखनीय है कि डॉक्टरों का अक्तूबर-2015 से वेतन भुगतान नहीं हुआ है. नव पदस्थापित स्टाफ व नर्सों को योगदान की तिथि मई से अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जबकि जुलाई-2015 से कुछ फार्मासिस्ट का वेतन भुगतान लंबित है. अन्य नियमित कर्मचारियों का भी पिछले चार माह से वेतन भुगतान बाधित है.
चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को पिछले चार साल से वरदी मुहैया नहीं करायी जा सकी है. इसके अलावा सेवा संपुष्टि, एसीपी का लाभ देने, हड़ताल अवधि का वेतन व एरियर भुगतान आदि अन्य कई समस्याएं हैं. बार-बार स्मार पत्र सौंपने के बाद भी समाधान नहीं होने पर कर्मचारियों ने चार फरवरी से चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया था.
इसमें चार से छह फरवरी तक जिले के तमाम स्वास्थ्य कर्मचारी काला बिल्ला लगा कर काम करने, आठ फरवरी को डीएम के समक्ष एक दिवसीय धरना देने, 11 फरवरी को अपने-अपने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन करने व 15 फरवरी को जिले के तमाम स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सिविल सर्जन के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था.
सिविल सर्जन ने आवंटन आते ही सभी का वेतन भुगतान करने, फरवरी माह के अंत तक एसीपी व एमएसीपी का लाभ देने, हड़ताल अवधी का अविलंब वेतन भुगतान करने, आशा कक्ष की व्यवस्था करने, एंबुलेंस कर्मियों का बकाया मानदेय भुगतान करने, हर 10 तारीख को आशा काे प्रोत्साहन के रुपये भुगतान करने व सभी कर्मचारियों के ग्रेड में नियमानुसार संशोधन करने का आश्वासन दिया है.
शिष्टमंडल में राजीव कुमार अखौरी, शैलेंद्र कुमार, रामपुकार शर्मा, उमेश कुमार, शिव कुमार चौधरी व संतोष कुमार आदि शामिल थे.
