गया: मगध विश्वविद्यालय में आयोजित इंडियन फिलॉस्फिकल कांग्रेस (आइपीसी) के 90वें अधिवेशन के समापन के दौरान आइएसएम (धनबाद) के कुलसचिव कर्नल एमके सिंह ने कहा कि दर्शन का मुख्य उद्देश्य कंस्ट्रक्शंस की रूपरेखा में कार्य करना है, जबकि आजकल तकनीकी से ज्यादातर डिस्ट्रक्शन का काम हो रहा है. दर्शन ही वह विषय है, जो अपने सिद्धांतों द्वारा तकनीक का भी मार्गदर्शन का सकता है.
अधिवेशन में भाग लेनेवाले प्रतिभागी प्रो गणेश दास, नीलोफर खान व सूरज मोहन सक्सेना सहित अन्य ने अपने व्यक्त किये और अधिवेशन के स्थानीय सचिव डॉ बीबी प्रसाद शर्मा डॉ जावेद अंजूम, डॉ कुसुम कुमारी, डॉ भिखारी राम यादव, डॉ विजय कुमार सिन्हा व डॉ मृत्युंजला कुमारी सिन्हा के प्रति अधिवेशन के दौरान बेहतर व्यवस्था के लिए आभार प्रकट किया.
इससे पहले अधिवेशन के समापन सत्र के दौरान आइपीसी के महासचिव प्रो पनीर सेलवम ने अकादमिक सत्रों की समीक्षा पेश की. उन्होंने बताया कि बोधगया में संपन्न 90वां अधिवेशन यादगार रहा. इसमें देश-विदेश के करीब 300 विद्वानों ने भाग लिया और अपनी विद्वतापूर्ण आलेखों से लोगों को प्रभावित किया. उन्होंने बताया कि यह सत्र इस दृष्टि से भी स्मरणीय होगा कि यहां आये सभी डेलीगेट्स ने अधिवेशन में की गयी व्यवस्था से काफी संतुष्ट थे. इस सफल आयोजन के लिए स्थानीय सचिव डॉ बीबी प्रसाद शर्मा व दर्शनशास्त्र विभाग के सभी शिक्षकों को धन्यवाद दिया. आइपीसी के संयुक्त सचिव प्रो सगिता साहा व प्रो एम नैयर ने इस सत्र के शैक्षिक कार्यक्रमों की गुणवता व आइपीसी के संगठनात्मक बिंदुअों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिये.
इस दौरान अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ एसके सिंह ने कुलपति प्रो एम इश्तियाक, तत्कालीन कुलसचिव डॉ एसके सिंह व दर्शन विभाग के सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया. धन्यवाद ज्ञापन के दौरान स्थानीय सचिव डॉ बीबी प्रसाद शर्मा ने कुलपति प्रो एम इश्तियाक, डॉ जावेद अंजुम, डॉ इसराइल खान, डॉ एसके सिंह, डॉ मृत्यंजला, डॉ शैलेश कुमार सिंह, अमरेंद्र कुमार सिंह, डॉ केडी वर्मा, डॉ मुनेश्वर प्रसाद, आदित्य कुमार व विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के प्रति आभार प्रकट किया.
