गया/हावड़ा : हावड़ा इलाके से विगत 29 जनवरी को अपहृत स्वर्ण व्यवसायी लक्ष्मी नारायण साव को गया से बरामद कर पुलिस सोमवार को हावड़ा पहुंची. साथ ही व्यवसायी अपहरण कांड के मास्टरमाइंड (फतेहपुर थाने के नगवां के रहनेवाले) अरविंद कुमार दास को पुलिस ने हावड़ा के सीजेएम की अदालत में पेश किया. न्यायाधीश ने आरोपित को 13 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया. वहीं हावड़ा पुलिस ने व्यवसायी से पूछताछ कर उनके परिजनों को सौंप दिया. साथ ही व्यवसायी का कोर्ट में बयान दर्ज कराने की तैयारी में जुट गये. गौरतलब है कि इस मामले में व्यवसायी की पत्नी बबीता ने हावड़ा थाने में एफआइआर दर्ज करायी थी.
फर्जीवाड़े में गयी थी अरविंद की नौकरी : ग्रामीण माहौल में बड़ा हुआ अरविंद काफी तेर-तर्रार है. वह अपरिचित लोगों से आसानी से बेहतर संपर्क बना लेता है. अपनी इसी काबिलियत के बदौलत अरविंद ने 1989 में डाक विभाग में पोस्टमैन की नौकरी ली थी. लेकिन, उसने वहां भी अपनी बुद्धि लगा दी और डाक घर में आने वाले मनी आॅर्डरों के भुगतान में फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया. 2007-08 में उसके विरुद्ध मनी आॅर्डरों के भुगतान में फर्जीवाड़ा करने की शिकायत डाक विभाग के वरीय अधिकारियों को लगी. कई महीनों तक इस मामले की जांच हुई. जांच में अरविंद दोषी पाया गया. वर्ष 2009 में डाक विभाग के वरीय अधिकारियों ने उसे नौकरी से बरखास्त कर दिया.
एक मुखिया के बहकावे में आ गये हैं बाप-बेटा : जानकारी के अनुसार, डाकघर की नौकरी समाप्त होने के बाद वह अरविंद खेती-बाड़ी में जुट गया. इसी दौरान व्यवसायी लक्ष्मी नारायण साव उनके भाई त्रिलोकी नारायण साव व उसके पिता जयनारायण साव उसके संपर्क में आये और जमीन बेचने के नाम पर उससे रुपये लिये. इन बाप-बेटों को रुपया देने के लिए अरविंद ने अपना मकान गिरवी रख दिया. लेकिन, लक्ष्मी व उसके पिता जमीन की रजिस्ट्री करने में आनाकानी करने लगे. छानबीन में पता चला कि उनके इलाके के एक मुखिया ने बाप-बेटों को बहका दिया है और अपना उल्लू सीधा करने के लिए जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने दे रहा है. बाप-बेटे व मुखिया की हरकत से थक कर उसने व्यवसायी का अपहरण किया.
