मुजफ्फरपुर: नीलगाय व जंगली सूअरों के आंतक से परेशान किसानों को केंद्र सरकार ने राहत दी है. बिहार के किसानों को एक साल के लिए नीलगाय व जंगली सूअर मारने की छूट दी गयी है. किसान इनका शिकार खुद कर सकते हैं. वन विभाग राेकने की बजाए किसानों की मदद भी करेगा. बिहार के तीस जिलों में दाेनों जानवरों को पूरी तरह मारने की छूट मिली है. साथ ही प्रदेश के अन्य बचे जिलों में जहां पर इन जानवरों का आंतक ज्यादा है वैसे क्षेत्रों पर भी मारने की खुली छूट दी गई है.
डीएफओ मीहिर झा ने बताया कि किसानों के फसल को बचाने के लिए भारत सरकार ने यह कदम उठाया है. इसके तहत किसान एक साल के भीतर नील गाय और जंगली सूअर का शिकार खुलेआम कर सकते हैं. इस पर सरकार का कोई रोक एक साल तक नहीं रहेगा.
क्यों लिया निर्णय
नीलगाय व जंगली सूअर के आंतक से पूरे बिहार के किसान परेशान हैं. नीलगाय झुंड में आकर फसल चर लेते थे. साथ ही जंगली सूअर फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचाते थे. इसकी वजह से किसानों की मेहनत की कमाई हर साल बर्बाद होती थी. इसकी शिकायत हर बार किसान वन विभाग से करते थे, लेकिन कोई पहल नहीं होती थी. इसके बाद केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी गयी. इस पर सरकार ने यह फैसला लिया है. फैसले के तहत एक दिसंबर से लेकर 30 नवंबर 2016 तक यह छूट किसानों को दी गयी है.
इन जिलों में पूरी तरह छूट
मुजफ्फटर, पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, सीतामढ़ी, दरभंगा, शिवहर, मधुबनी, बेगूसराय, खगड़िया, समस्तीपुर, मोतीहारी, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, सारंग, वैशाली, गोपालगंज, सीवान, छपरा, मधुबनी, शामिल है.
इन जिलों के प्रखंडाें में दी गई है छूट
गया, वजीरगंज, जहानाबाद, नवादा, औरंगाबाद, कैमूर, मुंगेर सहित बाकी बचे जिलों में ऐसे प्रखंडों में जानवरों को मारने की छूट दी गयी है, जहां पर नीलगाय और जंगली सूअर का आंतक ज्यादा है. इस क्षेत्र के किसान बिना किसी डर के इन दाेनों जानवरों का शिकार कर सकते हैं.
