सिर्फ कबाड़ में बिकने लायक होती हैं यहां की खराब गाड़ियां
जितेंद्र मिश्र
गया : दूसरों को नियम-कानून की बात सिखाने व पालन करने की सलाह देनेवाला नगर निगम खुद ही कानून की धज्जियां उड़ा रहा है. निगम में करीब 223 छोटी-बड़ी गाड़ियां चलायी जा रही हैं. इनमें से एक का भी इंश्योरेंस व रजिस्ट्रेशन नहीं है.
बोर्ड व स्टैंडिंग कमेटी की बैठकों में सिर्फ गाड़ियों की खरीद की बात की जाती है. इनके रखरखाव की बात पर कभी विचार नहीं किया गया. सैकड़ों गाड़ियां खरीदने के बाद भी किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इन सभी बातों पर ध्यान नहीं दिया. अब हालात यह है कि गाड़ियों का इंश्योरेंस व रजिस्ट्रेशन नहीं होने से खराब गाड़ियों की नीलामी भी नहीं की जा सकती है. खराब गाड़ियों को सिर्फ कबाड़ी में ही बेचना समाधान है.
नगरपालिका से नगर निगम बनने के बाद कई मेयर, डिप्टी मेयर व नगर आयुक्त ने यहां की जिम्मेदारी संभाली. एक ने भी अब तक इस दिशा में कारगर कदम नहीं उठाया. जबकि हर के रीजन में कोई-न-कोई गाड़ी खरीदी ही गयी है. यही कारण है कि पुरानी गाड़ियां यहां जंग लग कर सड़ गयीं. लेकिन, उनकी नीलामी नहीं की जा सकी है.
पटना रोड में स्थित एक चर्चित निजी स्कूल के प्रबंधन द्वारा छह बसों का परिचालन बिना रजिस्ट्रेशन व इंश्योरेंस के किया जा रहा है. इसकी भनक डीटीओ को मिल गयी. डीटीओ ने संबंधित स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. लेकिन, डीटीओ दफ्तर से चंद दूरी पर स्थित नगर निगम की 223 गाड़ियां बिना रजिस्ट्रेशन के ही चलायी जा रही हैं.
इसकी भनक डीटीओ को नहीं लगी. इस संबंध में डीटीओ जनार्दन कुमार ने बताया कि सरकारी या प्राइवेट सभी के लिए परिवहन कानून के तहत गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन व इंश्योरेंस करना जरूरी है. इससे कई तरह के फायदे भी हैं. निगम की गाड़ियों का भी रजिस्ट्रेशन व इंश्योरेंस होना चाहिए.
निगम में योजनाएं बड़ी-बड़ी बनायी जाती हैं. लेकिन, मॉनीटरिंग के अभाव में कोई काम पूरा नहीं हो पाता है. कर्मचारी, अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी व्यवस्थाएं लागू कराने तक काफी सक्रिय रहते हैं.
काम शुरू होने के बाद किसी का भी ध्यान इस ओर नहीं रहता है. इस कारण कई योजनाएं अब तक पूरी तौर से वार्डों में लागू नहीं हो सकी हैं. गाड़ियों की खरीद, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू कराने, कचरा प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, वेंडिंग जोन गठन आदि इसमें प्रमुख योजनाएं हैं. इनमें सभी पर काम जरूर शुरू किया गया. लेकिन, जमीन पर एक भी योजनाओं में सफलतापूर्वक काम पूरा नहीं किया जा सका है.
गाड़ी अगर किसी जगह पर एक्सीडेंट हो गयी, तो उसका कोई मुआवजा निगम को नहीं मिलता है. इतना ही नहीं कई बार एक्सीडेंट के बाद घायल व्यक्तियों को निगम अपने आंतरिक स्रोत से पैसा देता है. लोगों को यह मान लेना चाहिए कि निगम की गाड़ियों से अगर धक्का लगता है, तो कोई इंश्योरेंस कंपनी पीड़ित को लाभ नहीं देने वाली है. गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन व इंश्योरेंस करना प्राइवेट व सरकारी दोनों ही जगह जरूरी रखा गया है.
एक ओर जहां नगर निगम शहर के लोगों को कई चीजों में नियम का पालन करने की बात करता है, तो दूसरी ओर खुद ही नियमों का उल्लंघन खुलेआम कर रहा है. यहां तक की निगम में दैनिक मजदूरी पर बहाल करीब 200 ड्राइवरों में कई के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है.
