गया : अब टूटी पटरियों का पता लगाने के लिए एक डिवाइस लगाया जायेगा. इस डिवाइस में जीपीएस लगा होगा, जिसकी सहायता से पटरी के टूटे या खराब होनेे का पता लगाया जायेगा. इस डिवाइस को जिस जगह पर लगाया जायेगा उससे दो से तीन किलोमीटर की दूरी तक की टूटी या खराब पटरी का पता लगाया जा सकेगा. इस डिवाइस का कनेक्शन उस डिवाइस ड्रेस के साथ होगा, जिसे पहन कर रेलकर्मी रेलवे ट्रैक की मॉनीटरिंग करेंगे.
अब टूटी दिखी पटरी, तो नहीं दिखानी होगी लाल झंडी, डिवाइस रोकेगा ट्रेन
गया : अब टूटी पटरियों का पता लगाने के लिए एक डिवाइस लगाया जायेगा. इस डिवाइस में जीपीएस लगा होगा, जिसकी सहायता से पटरी के टूटे या खराब होनेे का पता लगाया जायेगा. इस डिवाइस को जिस जगह पर लगाया जायेगा उससे दो से तीन किलोमीटर की दूरी तक की टूटी या खराब पटरी का […]

कैसे काम करेगा डिवाइस जैसे ही उक्त डिवाइस के द्वारा किसी टूटी पटरी के बारे में पता लगाया जायेगा, इसका संकेत डिवाइस ड्रेस के माध्यम से ट्रैक की मॉनिटरिंग कर रहे रेलकर्मियों को मिल जायेगा. इसके बाद रेलकर्मी अपने डिवाइस ड्रेस में लगे बटन को दबाएंगे, ताे कंट्रोल को टूटी रेल पटरी के लोकेशन का पता चल जायेगा व कंट्रोल से ही उस ट्रैक पर आने वाली ट्रेन काे रोक दिया जायेगा.
सभी रेलखंडों में उपलब्ध कराये जायेंगे डिवाइस
सभी जोन मुख्यालयों को ये डिवाइस मुहैया कराये जायेंगे. इसके बाद गया-मुगलसराय, गया-धनबाद, गया-पटना, गया-किऊल, गया-जमालपुर सहित अन्य रेलखंडों के रेलकर्मियों को यह डिवाइस उपलब्ध कराये जायेंगे. जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) राजेश कुमार ने बताया कि रेलकर्मियों को टूटी हुई पटरी व खराब ट्रैक के दिखते ही अपने डिवाइस ड्रेस में लगा बटन दबाना होगा. टूटी पटरी की वजह से होने वाली संभावित दुर्घटना को रोकने में यह डिवाइस काफी सहायक होगा. संभावित रेल हादसों को रोकने के लिए रेलवे ने यह कदम उठाया है. गौरतलब है कि अब तक रेलवे ट्रैक के खराब होने व पटरी टूटने की जानकारी मिलने पर अभी तक गैंगमैन व चाबी मैन दिन के समय लाल झंडी दिखा कर ट्रेनें रुकवाते थे, क्योंकि तुरंत कंट्रोल व अधिकारियों को मैसेज कर ट्रेनें रुकवाना मुश्किल होता था.