गया : एनजीओ में 40 लाख की धोखाधड़ी के मामले में आरोप का गठन

गया : न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम श्रेणी) स्वाति सिंह की अदालत में शुक्रवार को फ्रांसीसी महिला जेनी पेरे उर्फ मम्मी जी समेत एक स्थानीय अभियुक्त पर धोखाधड़ी के मामले में आरोप गठित किया गया है. यह मामला बोधगया में संचालित एनजीओ जेन अमिताभ एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी फॉर पूअर एंड हेल्पलेस चिल्ड्रेन वेलफेयर ट्रस्ट की 40 लाख […]

गया : न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम श्रेणी) स्वाति सिंह की अदालत में शुक्रवार को फ्रांसीसी महिला जेनी पेरे उर्फ मम्मी जी समेत एक स्थानीय अभियुक्त पर धोखाधड़ी के मामले में आरोप गठित किया गया है.
यह मामला बोधगया में संचालित एनजीओ जेन अमिताभ एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी फॉर पूअर एंड हेल्पलेस चिल्ड्रेन वेलफेयर ट्रस्ट की 40 लाख रुपये की प्रोपर्टी से जुड़ा है. अभियुक्तों में मूलरूप से फ्रांस की रहनेवाली व बोधगया में 15 वर्षों से रह रही जेनी पेरे उर्फ मम्मी जी व मुन्ना पासवान शामिल हैं.
गौरतलब है कि इस मामले के सूचक बोधगया के पचहट्टी निवासी आनंद विक्रम ने 2015 में उक्त दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध परिवाद दायर किया था. इस मामले में बोधगया थाना कांड संख्या 131/15 दर्ज की गयी थी.
शुक्रवार को दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 406, 420, 467, 468, 471, 448 व 382/34 के तहत आरोप गठित हुआ. अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए 22 फरवरी, 2018 को सुनवाई का समय रखा था. लेकिन, किसी कारणवश इस पर सुनवाई नहीं हो सकी.
गैर कानूनी तरीके से ट्रस्ट की संपत्ति पर कब्जा
इस मामले में सूचक ने प्राथमिकी में कहा है कि 2003 में पचहट्टी बोधगया में उक्त एनजीओ की स्थापना की गयी थी. इसमें अस्थायी रूप से जेनी पेरे को डायरेक्टर बनाया गया था. जेनी पेरे ने इस ट्रस्ट की सभी प्रोपर्टी को धीरे-धीरे अपने नाम करा लिया. इसमें अन्य संपत्ति के अलावा महिंद्रा बोलेरो, महिंद्रा एक्सयूवी व लैपटॉप शामिल है.
इतना ही नहीं, उन्होंने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में भी अपने लोगों की नियुक्ति कर दी. सूचक ने अपने परिवाद में यह भी कहा कि 13 अप्रैल, 2015 को पांच-छह अभियुक्तों के साथ मुन्ना पासवान ऑफिस में घुस आया और गाली-गलौज की.
साथ ही हथियार दिखा कर दानपेटी से 15 हजार रुपये और कई दस्तावेज अपने साथ ले गया. यह जानकारी सहायक अभियोजन पदाधिकारी नीलम सिन्हा व आदित्य कुमार शर्मा ने दी है. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से उन्होंने अपना पक्ष रखा था. वहीं, बचाव पक्ष की ओर से कमलेश कुमार ने अपना पक्ष रखा.

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