लोक अदालत में 646 मामले निबटे

गया : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार रविवार को व्यवहार न्यायालय के परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसमें बैंक, बिजली, श्रम, मोटर दुर्घटना, फौजदारी समेत अन्य मामलों से संबंधित कुल 646 वादों का निबटारा किया गया. इससे तीन करोड़ 82 लाख 99 हजार 492 रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई. […]

गया : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार रविवार को व्यवहार न्यायालय के परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसमें बैंक, बिजली, श्रम, मोटर दुर्घटना, फौजदारी समेत अन्य मामलों से संबंधित कुल 646 वादों का निबटारा किया गया. इससे तीन करोड़ 82 लाख 99 हजार 492 रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई.

लोक अदालत का उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्र पटवारी ने दीप जला कर किया. उन्होंने संबोधन में कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में लोक अदालत के जरिये मुकदमा का निबटारा कराना आसान हो गया है. समझौता के आधार पर विभिन्न प्रकार के मामलों का निबटारा होने से पैसा व समय दोनों की बचत होती है. इस कार्यक्रम में मंच का संचालन अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम संजय कुमार झा ने किया.
इस अवसर पर एडीजे चार जय गणेश सिंह, एडीजे आठ शिल्पी सोनी राज,सीजेएम रामानंद राम,संदीप सिंह, आकांक्षा कश्यप, बार एसोसिएशन के सचिव मुरारी कुमार हिमांशु, अजीत कुमार, शिशिर कुमार, विमलेश कुमार, नंद किशोर श्रीवास्तव आदि मौजूद थे.
11 बेंच का हुआ था गठन
राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए 11 अलग-अलग बेंचों का गठन किया गया था. लोक अदालत में बैंक के कुल 489 मामलों से दो करोड़ 49 लाख 48 हजार 422 रुपये, बिजली के 113 मामलों से 52 लाख 96 हजार 770 रुपये, श्रम से संबंधित 11 मामलों से पांच लाख रुपये, मोटर दुर्घटना के 11 मामलों से 72 लाख 40 हजार रुपये, फौजदारी मामलों से 11 हजार और अन्य से संबंधित नौ मामलों से तीन लाख 33 सौ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ.
शेरघाटी में 269 वादों का हुआ निबटारा
शेरघाटी. रविवार को अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय शेरघाटी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. एसीजेएम धीरेंद्र कुमार ने दीप प्रज्वलित कर लोक अदालत का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि लोक अदालत के तहत सुलहनीय वाद को दोनों पक्षों की सहमति से समझौता कराया जाता है.
यह सरल और सस्ता न्यायिक प्रक्रिया है. ऐसे वादों में उलझे लोग इसके माध्यम से न्यायालय के चक्कर से छुटकारा पा सकते हैं. इससे एक ओर जहां न्यायालय का समय बचता है. वहीं वादी को सरल तरीके से न्याय मिल जाता है. इसका प्रचार-प्रसार अधिक से अधिक करें. ताकि सुलहनीय वादों का ज्यादा निबटारा कराया जा सके.
इस दौरान पैनल अधिवक्ता पुटुन प्रजापति, द्वितीय बेंच में न्यायिक सदस्य प्रेमचंद अनल व पैनल लायर ओम प्रकाश ने भाग लिया. इसके तहत 266 बैंकिंग वादों का निबटारा किया गया. जबकि 3 फौजदारी वादों को भी निबटाया गया. कूल 269 वादों में 82 लाख 67 हजार 98 रुपये राजस्व के समझौते कराये गये.

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