नोटबंदी के बाद शुरू हुई समस्या अब तक है बरकरार

कहीं कैश नहीं होने की समस्या, तो कहीं लिंक फेल, बंद रहती है ज्यादातर एटीएम गया : अगर आपको पैसों की तुरंत जरूरत है, और आप एटीएम कार्ड लेकर निकले हैं, तो यकीन मानिए अापको परेशान होना ही पड़ेगा. एटीएम में पैसे मिलेंगे या नहीं, यह पूरी तरह से आपकी किस्मत पर निर्भर करता है. […]

कहीं कैश नहीं होने की समस्या, तो कहीं लिंक फेल, बंद रहती है ज्यादातर एटीएम

गया : अगर आपको पैसों की तुरंत जरूरत है, और आप एटीएम कार्ड लेकर निकले हैं, तो यकीन मानिए अापको परेशान होना ही पड़ेगा. एटीएम में पैसे मिलेंगे या नहीं, यह पूरी तरह से आपकी किस्मत पर निर्भर करता है. शहर में दो दर्जन से अधिक एटीएम किसी न किसी कारण से बंद पड़ी मिलेंगी. अधिकतर जगहों पर कैश नहीं होगा, तो कुछ के पास लिंक फेल या दूसरी तकनीकी खामियोंं का बहाना. ऐसे में हर रोज सैकड़ों लोग केवल इसी चक्कर में पूरा शहर घूम लेते हैं कि पैसे कहां मिलेंगे. शहर में एटीएम में पैसों की कमी कोई नयी बात नहीं है. नोटबंदी के बाद से यह समस्या व्यापक पैमाने पर शुरू हुई जो अब तक जारी है.
मुश्किल यह है कि इन कैशलेस एटीएम पर न तो बैंक के अधिकारी कुछ बोल रहे हैं, न ही जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारी. प्रभात खबर ने तय किया कि हर रोज एक बैंक की एटीएम की स्थिति की पड़ताल होगी. शुक्रवार को पहली पड़ताल स्टेट बैंक आॅफ इंडिया से शुरू हुई. शहर की मुख्य जगहों पर आधे दर्जन एटीएम पड़ताल में बंद मिलीं. जानिए कुछ एटीएम का हाल, पेश है हकीकत.
समय – 11:45 बजे
एटीएम के मुख्य गेट पर कैश नहीं होने से संबंधित बोर्ड लगा था. कई ग्राहक आकर लौट रहे थे. यहां ड्यूटी पर रहे गार्ड ने बताया कि सामान्यत: यहां पैसे रहते हैं. आज ही यहां कैश की दिक्कत हुई है.समय : 12:00 बजे
यहां एटीएम के पास कई लोग खड़े थे. एटीएम के बाहर किसी प्रकार की सूचना नहीं थी. अंदर स्क्रीन पर एक बोर्ड लगा था, जिस पर लिखा था ‘एटीएम अस्थायी रूप से काम नहीं कर रहा है, आपको हुई असुविधा के लिए खेद है.’ गार्ड का अता-पता नहीं था. पास का दुकानदार लोगों से कहा रहा था कि कैश है, ट्राइ करें.
समय – 12:30 बजे
एटीएम का आधा शटर गिरा हुआ था. शटर पर एक बोर्ड टंगा मिला, जिस पर लिखा था ‘ 100 का नोट नहीं है, 500 दे रहा है ‘. गार्ड से पूछने पर बताया कि सुबह से कैश खत्म है. आज पैसे डालने कोई नहीं आया. इस वजह से शटर डाउन कर रखा है.
एपी काॅलोनी
ट्रेनों में लगाये जायेंगे बायो टॉयलेट
क्या कहते हैं अधिकारी
रेल कोच फैक्टरी के अधिकारी ने कहा, ‘‘अभी तो हम डीआरडीओ से बैक्टीरिया ले रहे हैं. लेकिन सभी डिब्बों की जरूरतें पूरी करने के लिए हमें खुद ही बैक्टीरिया का उत्पादन करना होगा. यह संयंत्र निकट भविष्य में काम करने लगेगा. उन्होंने बताया कि एक बायो टाॅयलेट की कीमत लगभग एक लाख रुपये तक होगी. इसमें बदबू नहीं आयेगी और इससे रेल की पटरियों का वह क्षय भी रोका जा सकेगा जो अपशिष्ट पदार्थों के उन पर गिरने की वजह से होता है. रेलवे को हर साल इस तरह से करीब 350 करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान होता है. रेलवे इन शौचालयों का परीक्षण कुछ रेलों में सफलतापूर्वक कर चुका है. रेलवे ने एक समिति बनायी है जो रेलों के पुराने 50 हजार डिब्बों में लगभग सवा लाख बायो टाॅयलेट लगाने के लिए विस्तृत मसौदा तैयार कर रही है.
बायो टॉयलेट से मिलेंगी सुविधाएं
पर्यावरण के अनुकूल
रासायनिक क्रिया और ऑक्‍सीकरण के कारण पटरी को होने वाले नुकसान को बचाना
रेलवे स्‍टेशनों पर बेहतर सौंदर्यीकरण
बायो टॉयलेट लगाने के क्या होंगे फायदे
रखरखाव की कोई खास जरूरत नहीं
सरल डिजाइन
वर्तमान डिब्‍बों में आसानी से लगाये जा सकते हैं
दो वर्ष तक काम में लाया जा सकता है
दलित व महादलित परिवार के बच्चों को दी पाठ्यसामग्री

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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