धीमी आवाज होने से किसी ने नहीं किया नोटिस : सहकर्मी
परैया : थाना परिसर में बनी नयी बिल्डिंग में सभी पदाधिकारी व सिपाही रहते हैं. इसी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर दाहिनी तरफ एक कमरे में एसआई गौरी शंकर ठाकुर रहते थे. थाने का आॅफिस अभी पुरानी बिल्डिंग में ही चल रहा है. इतने लोगों के एक साथ रहने के बावजूद किसी ने गोली चलने की आवाज नहीं सुनी. घटना के बारे में सहकर्मी बबन सिंह व सुरेश राम आदि ने बताया कि ठाकुर साहब हर दिन की तरह सुबह-सुबह मोरहर नदी पुल पर टहलने गये थे. वहां से आने के बाद थाना परिसर के बाहर लाल बाबू की दुकान पर चाय पी. अपने कमरे के बाहर छत पर टहल रहे थे.
नयी बिल्डिंग के तीसरे तल्ले के ऊपर मधुमक्खी के छत्ते को हटाने के लिए मजदूर को बुलाया गया था. वहां मधु निकालने का काम चल रहा था. पदाधिकारी व जवान ऊपर के तल्ले पर मधु निकलने के काम को देख रहे थे. उस समय ठाकुर जी अपने कमरे में थे. सहयोगी ने बताया कि कुछ खाने के बाद थोड़ी देर आराम करते थे, गोली चलने की हल्की आवाज आयी. इसे कोई सुन नहीं पाया. कुछ देर बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें फोन किया गया. फोन नहीं उठाने पर अनहोनी की आशंका हुई. करीब एक घंटे बाद थानाध्यक्ष के आदेश पर एएसआई शिव मंदिर सिंह ने कमरे को खुलवाने का प्रयास किया. बाद में दरवाजा तोड़ा गया. बाजार में चर्चा है कि कोई गोली मारने के बाद इस तरह की स्थिति में नहीं रह सकता है. जांच के बाद ही हत्या या आत्महत्या के रहस्य से पर्दा उठ सकेगा.
सिर को भेदते तकिये में फंसी मिली गोली
देर शाम तक एफएसएल की टीम के इंतजार में शव को नहीं उठाया जा सका. रात आठ बजे फॉरेंसिक टीम घटना स्थल पर पहुंची, जिसके दो सदस्यों द्वारा मृत एसआई के हांथों के निशान, घटना में प्रयुक्त रिवाॅल्वर व कमरे में मौजूद अन्य सामान की जांच की गयी. फॉरेंसिक टीम के सदस्य चर्चा करते सुने गये कि गोली ठाकुर की दाहिनी कनपट्टी में लगी, जो सिर के पीछे निकल कर तकिये के अंदर से मिली. सर्विस रिवॉल्वर से पांच गोलियां व एक खोखा मिला है. फोरेंसिक टीम की जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मगध मेडिकल अस्पताल भेज दिया गया.
