मरीजों के परिजन प्राइवेट एंबुलेंस से जाने पर हो रहे हैं मजबूर
गया : मगध प्रमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल मगध मेडिकल काॅलेज महज तीन एंबुलेंस के भरोसे चल रहा है.गंभीर स्थिति में अधिक मरीज पहुंचने पर अस्पताल के पास उन्हें पटना भेजने की कोई व्यवस्था नहीं है. कई बार ऐसे मामले आये हैं, जब महज कुछ घंटे के भीतर पांच से छह गंभीर मरीज अस्पताल पहुंच गये. अस्पताल ने उन्हें पटना तो रेफर कर दिया, लेकिन एंबुलेंस था ही नहीं. इस स्थित में मरीज के परिजन प्राइवेट एंबुलेंस लेकर पटना गये. अस्पताल के अधिकारियों की मानें, तो यहां हर रोज इमरजेंसी वार्ड में औसतन 70 – 80 मरीज आते हैं.
इनमें 10 प्रतिशत यानी करीब सात-अाठ मरीज रेफर किये जाते हैं. अब मरीज पटना जाये कैसे यह भी उसे ही सोचना होता है. अभी कुछ दिनों पहले ही प्रमंडल आयुक्त जितेंद्र श्रीवास्तव ने भी यहां एंबुलेंस की कमी को लेकर चिंता जतायी थी.उन्होंने कहा कि किसी आपदा की स्थिति में मेडिकल काॅलेज कम से कम 25 एंबुलेंस की जरूरत है.
कई मामलों में पटना जाना अनिवार्य : मगध मेडिकल काॅलेज व अस्पताल में जो मुख्य समस्या है वह यह कि यहां न्यूरोसर्जरी व कार्डियोलॉजी का कोई विभाग नहीं है.ऐसी स्थिति में अगर कभी भी इन दो समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति अस्पताल पहुंच जाता है, तो उन्हें पीएमसीएच रेफर करना ही पड़ता है. न्यूरो और कार्डियो दोनों ही गंभीर मामले है.
सही समय पर अगर मरीज पटना नहीं पहुंच सका, तो उसकी जान भी जा सकती है. अस्पताल के ही एक कर्मचारी के मुताबिक कभी-कभी एक दिन में कई सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं. न्यूरोसर्जरी नहीं होने की वजह से घायल को पीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है. फिर पता चलता है कि कैंपस में एंबुलेंस है ही नहीं. सभी पहले ही मरीज लेकर पटना गये हैं. ऐसी स्थिति में घायल को कैसे भेजा जाये यह समस्या हो जाती है.
