शहरी आवास योजना से दूर हैं गरीब-गुरबे पांच में एक हजार से अधिक लाभुक फर्जी !

500 लाभुकों के कागजात व नाम नहीं मिले, प्रत्यर्पण की तैयारी जांच करनेवाले कर्मचारी पर लगते रहे हैं वसूली के आरोप गया : प्रधानमंत्री आवास योजनाओं का लाभ देने के लिए लाभुकों का डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजे हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत गये लेकिन एक हजार से अधिक लाभुकों का नाम-पता […]

500 लाभुकों के कागजात व नाम नहीं मिले, प्रत्यर्पण की तैयारी
जांच करनेवाले कर्मचारी पर लगते रहे हैं वसूली के आरोप
गया : प्रधानमंत्री आवास योजनाओं का लाभ देने के लिए लाभुकों का डीपीआर तैयार कर सरकार को भेजे हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत गये लेकिन एक हजार से अधिक लाभुकों का नाम-पता निगम कर्मचारी अब तक नहीं ढूंंढ पाये हैं. इस योजना के तहत 5069 लाभुकों की सूची में अबतक महज 1400 लाभुकों को ही मकान बनाने के लिए पैसा दिया जा सका है.
सूत्रों का कहना है कि एक हजार से अधिक लाभुकों के नाम पर रैयती जमीन नहीं होने की बात सामने आ रही है. इस योजना में लगभग 500 लाभुकों की सूची प्रत्यर्पण के लिए सरकार को भेजने की तैयारी की जा चुकी है. अन्य की यहां के अधिकारी जांच होने की बात कह रहे हैं. इससे यह तय हो गया है कि सरकार को लाभुकों का डीपीआर भेजने से पहले अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की जांच पड़ताल नहीं की गयी थी. आनन-फानन में सूची जैसे-तैसे तैयार कर स्वीकृति के लिए सरकार को भेज दी गयी.
मिलती रही है अनियमितता की सूचना
जानकारी के अनुसार, आवास योजनाओं में लाभुकों की सूची भेजने से पहले लाभुक की जमीन की जांच जरूरी होती है. इसके बाद कर्मचारी, नोडल अधिकारी व नगर आयुक्त लाभुक के लिए अनापत्ति पत्र जारी करते है.
2015-16 में सरकार ने इस योजना के तहत लाभुक चयन से पहले कोई दिशा-निर्देश नहीं दिये थे. 2016-17 में लाभुक की सूची तैयार करने से पहले उनकी जमीन संबंधी कागजात की जांच करनी थी लेकिन सूत्रों का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इशारे पर सारी सूची तैयार की गयी. यही नहीं नगर आयुक्त व नोडल अधिकारी ने इनके जमीन संबंधी जांच का सर्टिफिकेट भी दे दिया. सूची सरकार से स्वीकृत होने के बाद फर्जीवाड़े का मामला सामने आ रहा है.
यह भी है एक मामला : सूची आने के बाद यहां कागजात जांच के लिए यहां सभी वार्डों में नगर आयुक्त ने कर्मचारी प्रतिनियुक्त कर दिये.
कर्मचारियों को सूची के अनुसार लाभुक को खोजने की जिम्मेदारी दी गयी है. कर्मचारियों के कई जगह जाने पर बता खुल कर सामने आयी कि सूची में कई ऐसे भी नाम हैं जिनके नाम से रैयती जमीन ही नहीं है. इतना ही नहीं पहले से बने हुए मकान के मालिक का नाम भी सूची में दर्ज है.
जांच के दौरान कई कर्मचारियों पर भी रिपोर्ट देने में पैसा मांगने का आरोप भी लगा है. वार्ड नंबर 42 में एक व्यक्ति द्वारा आवास योजना के नाम पर प्रथम किस्त से ही 20-25 हजार रुपये लेने का आरोप संबंधी पत्र निगम में दिया गया है. इतना ही नहीं कर्मचारी पर पैसा नहीं देने पर लाभुक को योजना से वंचित करने की धमकी दिये जाने की बात सामने आयी है. अधिकारी सिर्फ जांच की बात कह कर मामले को टाल देते हैं.
यह कहना है नोडल अधिकारी का
वर्ष 2015-16 में करीब 500 लाभुकों का प्रत्यर्पण के लिए बोर्ड में प्रस्ताव लाने के लिए नगर आयुक्त व मेयर को रिपोर्ट सौंपी जा रही है. 2016-17 के स्वीकृत लाभुकों की सूची की जांच की जा रही है. जमीन रैयती होना इस योजना के लिए सबसे जरूरी माना गया है. इसके बिना इस योजना का लाभ मिलना संभव नहीं है. जांच पूरी होने के बाद ही वर्ष 2016-17 सही लाभुकों का आंकड़ा मिल सकेगा.
राजमणि गुप्ता, नोडल पदाधिकारी सह सिटी मैनेजर

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >