स्टाफ की मिलीभगत से हुआ करोड़ों का नुकसान

नक्शा पास करने में नियम का नहीं रखा गया ध्यान अब समिति बना कर करायी जायेगी जांच गया : नगर निगम स्टैंडिंग कमेटी की शनिवार को हुई बैठक में पूरी तौर से पुराने फैसलों पर सवाल उठाया गया. मेयर वीरेंद्र कुमार की अनुमति के बाद बैठक जैसे ही शुरू हुई, तो नियम-कानून का हवाला देकर […]

नक्शा पास करने में नियम का नहीं रखा गया ध्यान

अब समिति बना कर करायी जायेगी जांच
गया : नगर निगम स्टैंडिंग कमेटी की शनिवार को हुई बैठक में पूरी तौर से पुराने फैसलों पर सवाल उठाया गया. मेयर वीरेंद्र कुमार की अनुमति के बाद बैठक जैसे ही शुरू हुई, तो नियम-कानून का हवाला देकर डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव पिछले दिनों लिए गये फैसले व अधिकारी के आदेश को नियम के विपरीत साबित करते दिखे. बैठक में बिल्डिंग नियमावली का हवाला देकर डिप्टी मेयर ने कहा कि यहां के इंजीनियर व अधिकारी की मिलीभगत से नक्शा नियम-कानून को ताक पर रख कर पास किया गया है. इसमें अपनी गलती सुधारने के लिए अधिकारियों ने दबाव में बिल्डर पर फाइन नाम मात्र का किया.
इससे निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि शहर में बेतरतीब तरीके से नियम कानून को ताक पर रख कर मकान, बिल्डिंग, व्यापारिक कॉम्प्लेक्स आदि बनाने के लिए नक्शे पारित किये गये हैं. बैठक में सहमति बनी कि एक समिति का गठन कर जांच करायी जाये. इस कमेटी में निगम के इंजीनियर, निगम से प्राधिकृत आर्किटेक्ट, पार्षद आदि शामिल रहेंगे. नगर आयुक्त जनार्दन अग्रवाल ने कहा कि कई मामलों में हाइकोर्ट से फैसला हो चुका है. इसलिए इसमें हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है. इस पर डिप्टी मेयर ने कहा कि हाइकोर्ट ने कभी भी निगम को कानून के विरोध में नक्शा पारित करने पर कोई फैसला नहीं दिया है.
निगम की परिसंपत्ति 20 से हो गयी 15
बैठक में डिप्टी मेयर ने कहा कि निगम में विकास प्राधिकार के विलय के बाद निगम की परिसंपत्ति 20 हो गयी थी. इसमें पुराने आवेदन को साक्ष्य दिखा कर नियम के विपरीत जमीन की रजिस्ट्री की गयी है. इसके बाद निगम में अब परिसंपत्ति की संख्या 15 बच गयी है. रजिस्ट्री के फाइल को देखने से साफ हो जाता है कि कानूनी सलाहकार ने मंतव्य दिया था कि स्टैंडिंग व बोर्ड की अनुमति बिना निगम की किसी जमीन को किराया या फिर लीज पर नहीं दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कई जगह जमीन बेचने का मामला सामने आया है. इस मामले में स्टैंडिंग के सभी सदस्यों ने जांच करा कर कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित किया.
सात निश्चय योजनाओं का काम जल्द किया जाये पूरा
बैठक में नगर आयुक्त ने कहा कि सात निश्चय योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर किया जाये. इसमें किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए. बैठक में सहायकों ने जानकारी दी कि दर्जनों योजनाओं में काम अब तक शुरू नहीं किया गया है. बैठक में सदस्यों ने डिप्टी मेयर के हर तर्क को सही बता रहे थे. दूसरी ओर नगर आयुक्त जनार्दन अग्रवाल व अपर नगर आयुक्त सुशील कुमार उनकी हर बात पर जवाब देने का प्रयास करते जरूर दिखे.
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में मेयर वीरेंद्र कुमार, डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव, नगर आयुक्त जनार्दन अग्रवाल, कार्यपालक अभियंता रजनीकांत तिवारी, अपर नगर आयुक्त सुशील कुमार, सिटी मैनेजर राजमणि गुप्ता, लेखा पदाधिकारी गौतम कुमार, राजस्व पदाधिकारी विजय कुमार सिन्हा, सहायक अभियंता विनोद प्रसाद, शैलेंद्र कुमार, कनीय अभियंता सुबोध सिंह, देव कुमार, स्टैंडिंग सदस्य विनोद यादव, मनोज कुमार, अबरार अहमद, मोहम्मद चुन्नू खां, उषा देवी व स्वर्णलता वर्मा आदि मौजूद थे.
डी-सिल्टिंग मशीन के लिए एडवांस का मामला भी उठा
पिछले वर्ष डी-सिल्टिंग मशीन की खरीदारी के लिए सप्लायर कंपनी को नियम के विपरीत एडवांस दिये जाने का भी मामला बैठक में उठा. मामले को उठाते हुए डिप्टी मेयर ने कहा कि मशीन के सप्लायर कंपनी को नियम के विपरीत 60 लाख रुपये एडवांस दिये गये. जबकि खरीदारी आदेश को ही स्टैंडिंग व बोर्ड ने कैंसिल कर दिया है. जानकारी हो कि इस मामले में एडवांस गुपचुप तरीके से नियम के विपरीत कंपनी को दिया गया था. फाइल पर एक सहायक अभियंता द्वारा वित्तीय नियमावली के अनुसार एडवांस दिया जा सकता है, की अनुशंसा के बाद ही अग्रीम देने का मामला सामने आया है. इस मामले में बैठक में नगर आयुक्त से अगली बैठक में रिपोर्ट रखने की मांग की गयी.

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