अलग-अलग बाेली-भाषा के दिखे लोग, आेटीए में झलकी देश की संस्कृति

गया : अवसर था आेटीए में 12वीं पासिंग आउट परेड में पिपिंग सेराेमनी का. देश के काेने-काेने से कैडेट जाे यहां ट्रेनिंग ले रहे, उनकी पासिंग परेड के बाद पिपिंग सेराेमनी हाे रही थी. उनके कंधे पर अभिभावक वह बैज लगा रहे थे, जाे उन्हें आर्मी में लेफ्टिनेंट अफसर बना रहा था. इस माैके पर […]

गया : अवसर था आेटीए में 12वीं पासिंग आउट परेड में पिपिंग सेराेमनी का. देश के काेने-काेने से कैडेट जाे यहां ट्रेनिंग ले रहे, उनकी पासिंग परेड के बाद पिपिंग सेराेमनी हाे रही थी. उनके कंधे पर अभिभावक वह बैज लगा रहे थे, जाे उन्हें आर्मी में लेफ्टिनेंट अफसर बना रहा था. इस माैके पर ऐसा लग रहा था जैसे देश की संस्कृति आेटीए के ग्राउंड पर उतर आयी हाे. अलग-अलग वेश-भूषा, कद-काठी व बाेली-भाषा से हर काेई उनके प्रांत काे अपने जेहन में उतार सकता था. कश्मीर से कन्याकुमारी तक का नजारा था. बड़ा ही मनभावक दृश्य था. अनेकता में एकता का भारत दिख रहा था. अपने बेटे, भाई, पति के कंधे पर बैज लगाते बड़े भावुक थे.

सारे जहां से अच्छा हिंदाेस्तां हमारा…
इससे पहले परेड ग्राउंड पर विशिष्ट अतिथि अफगान आर्मी चीफ के सामने ‘कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा…’, ‘सारे जहां से अच्छा हिंदाेस्तां हमारा…’ की बैंड धुन पर कैडेट्स कदमताल करते हुए बढ़ रहे थे. उनका तालमेल व देश के प्रति जज्बा देखते बन रह था. देशभक्ति गीत न सिर्फ कैडेट्स, बल्कि वहां बैठे लाेगाें में भी देशभक्ति का जुनून भर रहा था. कैडेट्स की टुकड़ियां सलामी मंच से आगे बढ़ रही थी ताे निरीक्षण पदाधिकारी काे सैल्यूट करते आगे बढ़ रहे थे. 1971 के भारत-पाक युद्ध में प्रयुक्त हुए विजयन टैंक भी संघर्ष की गाथा कह रहा था. मार्च पास्ट के दाैरान परेड का नेतृत्व परेड कमांडर पुरुषाेत्तम कुमार कर रहे थे. परेड ग्राउंड पर जब कार्यक्रम चल रहा था तब तीन हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज, इंडियन आर्मी का ध्वज व आेटीए ध्वज हवा में लहराते ऊपर से गुजर रहे थे, जिनका सम्मान हर किसी ने किया.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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