नियम. नयी खनन नीति में कहीं के भी लाइसेंसी विक्रेता से खरीदा जा सकेगा बालू
एक दिसंबर के बाद ऑर्डर देने के सात दिनों के अंदर घर पर ही पहुंच जायेगा बालू
गया में बालू के लाइसेंस के लिए 764 लोगों ने किया है आवेदन
गया : बिहार सरकार के खनन विभाग द्वारा बालू व पत्थर खनन तथा बिक्री की नयी नीति लागू करने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, इससे जुड़ी जानकारियां भी सामने आ रही हैं. नयी नीति लागू होने के बाद कैमूर जिले में भी बालू की खरीद-फरोख्त का सिस्टम पूरी तरह बदल जायेगा. अब तक शहर सहित पूरे जिले में खरीदार को जब जरूरत होती था, तो वह कहीं से भी बालू खरीद लेता था. लेकिन, नयी नीति में उसे बालू के लिए बिहार राज्य खनन निगम में या खुदरा लाइसेंसी विक्रेताओं के यहां ऑर्डर देना होगा. ऑर्डर देने के सात दिन के अंदर खरीदार के घर तक बालू पहुंचाने की जिम्मेदारी अब लाइसेंस लेकर बालू बेचनेवालों की रहेगी.
खुदरा डीलर की यह जिम्मेदारी होगी कि वह बालू को खनन स्थल से मंगवा कर ग्राहक को सप्लाई करे. इसके बदले में खनन स्थल से ग्राहक के डिलीवरी स्थल तक 20 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति 100 सीएफटी वाहन भाड़ा लगेगा. बदले में बालू विक्रेता को बालू की बिक्री मूल्य का आठ प्रतिशत कमीशन के तौर पर मिलेगा. खनन विभाग की यह नयी व्यवस्था एक दिसंबर से जिले में लागू होने जा रही है. गया जिले में बालू के लाइसेंस के लिए कुल 764 लोगों ने आवेदन किया है़ यह जानकारी जिला खनन पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा ने दी है. उन्होंने बताया कि डीएम के निर्देश पर आये आवेदनों की स्क्रूटनी की जा रही है.
इसके बाद तय मानक पूरा होते देख ही नया लाइसेंस जारी होगा.लाइसेंसी खुदरा विक्रेता ही अब लोड करायेंगे बालू बालू खरीदने के लिए उपभोक्ता द्वारा पैसे जमा कराने के बाद खुदरा विक्रेता खाली वाहन के साथ नजदीकी बालू घाट तक जायेंगे और वहां खनन निगम के कर्मचारी को इनवॉयस सौपेंगे, जहां वाहन पर बालू लोड होने के बाद कर्मचारी ग्राहक का पता लिखा ई-चालान खुदरा विक्रेता को देंगे. इसके बाद वाहन को सीधे ग्राहक के बताये स्थान पर लाकर बालू अनलोड कराने की जिम्मेदारी खुदरा लाइसेंस धारक की होगी. ग्राहक अपने यहां गिरे बालू की मात्रा से संतुष्ट होने के बाद ई-चालान पर लिखी रकम खुदरा विक्रेता को दे देगा. भुगतान के बाद खुदरा विक्रेता खनन निगम की वेबसाइट पर जाकर फाइनल डिलिवरी को फीड करेंगे. तब उस ग्राहक के साथ सौदे को पूरा हुआ माना जायेगा.
एेसे ग्राहक कर सकते हैं ऑर्डर
एक दिसंबर से बालू का ऑर्डर करने के लिए ग्राहक के पास तीन विकल्प मौजूद होंगे. पहला, ग्राहक बिहार राज्य खनन निगम के कार्यालय में फोन कर बालू खरीदने का ऑर्डर दे सकता है. दूसरा खनन निगम की वेबसाइट पर लॉग-इन कर अपना ऑर्डर प्लेस कर सकेंगे. तीसरा विकल्प होगा खुदरा डीलर के पास जाकर ऑर्डर देने का. जानकारी के मुताबिक, खनन निगम अपने पास आये ग्राहकों के ऑर्डर को संबंधित क्षेत्र के लाइसेंसी खुदरा विक्रेता के पास ऑनलाइन भेज देगा.
इसके बाद खुदरा विक्रेता उस पर जिले में खुले कार्यालय में बालू के लिए निर्धारित राशि जमा करेंगे और इनवॉयस हासिल करेंगे. निगम के कार्यालय में बालू के पैसे डीडी के माध्यम से जमा होंगे. इसके अलावा ई-वॉलेट अथवा पॉस मशीन से भी ऑनलाइन पैसे जमा करने की व्यवस्था होगी.
बालू गिरने के बाद देने हैं रुपये
बालू सहित अन्य खनिज को लेकर खनन निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि बालू के साथ पत्थर की बिक्री में भी यही नियम लागू रहेगा. ग्राहक से ऑर्डर मिलने के सात दिनों के अंदर हर हाल में उसे मेटेरियल की सप्लाई करने की जिम्मेदारी खुदरा विक्रेता की होगी. यदि, ग्राहक को समय पर मेटेरियल की आपूर्ति नहीं होगी, तो खुदरा विक्रेता को देय आठ प्रतिशत कमीशन पर खनन निगम पेनाल्टी लगा सकता है. निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक से किसी भी हाल में मेटेरियल का एडवांस नहीं लेना है और उसके यहां बालू गिरने के बाद ही पैसा लेना है.
खुदरा मांग के लिए स्टॉक रखने की छूट
बालू के ग्राहकों में वैसे भी लोग होते हैं, जिनकी जरूरतें एक ट्रैक्टर यानी करीब 100 सीएफटी (एक सौ घन फुट) बालू से भी कम की होती हैं. इनकी जरूरतें पूरी करने के लिए खुदरा अनुज्ञप्तिधारी एक-एक हजार सीएफटी बालू और पत्थर का स्टॉक अपने पास कर सकेंगे. हालांकि, इसकी बिक्री केवल उन्हें ही करनी है, जिनकी जरूरत कम हो. बिक्री का पूरा ब्योरा भी उन्हें रखना होगा. जिले में बालू की नयी खरीद नीति के संबंध में जिला खनन पदाधिकारी दिलीप कुमार ने बताया कि बालू और स्टोन चिप्स की बिक्री के लिए नयी नियमावली के तहत विभाग से मार्गदर्शन मिल रहे हैं. खुदरा विक्रेता के लाइसेंस के लिए साढ़े 1100 से ज्यादा आवेदन आये हैं. एक दिसंबर से पहले सब कुछ ठीक कर लिया जायेगा.
