कूड़े के आगे ढेर हो रही निगम की सफाई फौज

गया: निगम में संसाधन की कोई कमी नहीं है. सफाई कर्मचारियों की भी अच्छी फौज है. इसके बावजूद शहर में कई जगहों पर कूड़े का ढेर देखने को मिल ही जाता है. इसका मुख्य बदइंतजामी बताया जा रहा है. लोगों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन नहीं होने के कारण ऐसी मुसीबतों का सामना करन […]

गया: निगम में संसाधन की कोई कमी नहीं है. सफाई कर्मचारियों की भी अच्छी फौज है. इसके बावजूद शहर में कई जगहों पर कूड़े का ढेर देखने को मिल ही जाता है. इसका मुख्य बदइंतजामी बताया जा रहा है.
लोगों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन नहीं होने के कारण ऐसी मुसीबतों का सामना करन पड़ रहा है. कई इलाकों में लोगों की शिकायत रहती है कि उनके मुहल्ले में झाड़ू लगाने के लिए सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचते. इनमें मुख्य तौर पर गोविंदपुर, गोपीबिगहा, घुटिया व कलेर के लोग अधिक परेशान हैं. इन इलाकों को नौ वर्ष पहले नगर निगम में शामिल किया गया, लेकिन अब तक यहां किसी तरह की शहरी सुविधा नहीं दी गयी है.
आम लोग भी कम नहीं, डस्टबिन के बजाये सड़क पर डाल देते हैं कचरा : निगम के कर्मचारी एक बार सफाई कर मुहल्ले से गये, तो कुछ ही देर में उसी जगह कूड़े का ढेर जमा हो जाता है. निगम द्वारा कूड़ा जमा करने के लिए सड़क के किनारे जगह-जगह डस्टबिन रखे गये हैं. लेकिन, लोग घरों व दुकानों से कूड़ा निकाल कर डस्टबिन में न डाल सीधे सड़क पर फेंक देते हैं.
सफाई के समय को लेकर उठ चुके हैं सवाल : आमतौर पर अधिकतर शहरों में अहले सुबह तक साफ-सफाई पूरी कर ली जाती है. इसका मुख्य ध्येय होता है कि घर से निकलने पर लोगों को कचरे का दर्शन न हो. लेकिन, गया में सफाई व्यवस्था अन्य शहरों की तुलना में उलटी है. यहां छह बजे से साफ-सफाई शुरू होती है, जो 11 बजे समाप्त होती है. कई जगहों पर नालियों से सिल्ट निकाल कर भी ऐसे ही छोड़ दिये जाते हैं.
धीरे-धीरे सुधारी जा रही व्यवस्था
शहर में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए धीरे-धीरे प्रयास किया जा रहा है. पूरी तौर से व्यवस्था सुधार के लिए आम लोगों को सहयोग करना होगा. ऐसे हाल के दिनों में कई निर्णय निगम में सुधार की दिशा में लिया गया है. इसका परिणाम जल्द ही लोगों को दिखने लगेगा. डोर-टू-डोर कलेक्शन का काम शहर में जल्द ही पूरी तौर से लागू कर दिया जायेगा. सफाई का समय परिवर्तन के लिए बोर्ड में फैसला लिया गया है. इसपर अमल करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
वीरेंद्र कुमार, मेयर
क्या है आम लोगों की राय
घर से स्नान कर बाजार निकलते हैं. निगम कर्मचारी इसी क्रम में सड़क पर झाड़ू लगाते हैं. बाजार पहुंचते-पहुंचते धूल के कारण मन खिन्न हो जाता है. इस व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है. इसमें निगम के साथ-साथ आम लोग व दुकानदारों को भी पहल करना होगा. दुकानदार अपने दुकान की सफाई रात में कर लें, ताकि सुबह झाड़ू लगने के बाद कचरा कही नहीं नजर न आये. आम लोगों को भी कचरा निश्चित स्थल पर फेंकने की आदत डालनी होगी.
अरुण प्रसाद
बड़े शहरों में सफाई का काम रात्रि में पूरा कर लिया जाता है. इस व्यवस्था में यहां के निगम के कर्मचारी को लाने के लिए पहल करनी होगी. आम लोगों की आदतों में सुधार के लिए निगम को यत्र-तत्र कूड़ा फेंकने पर दंड कड़ाई से लागू करना होगा. दिन में सफाई होने से स्कूल, मंदिर व ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी होती है. इसमें सुधार लाने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति रख कर निगम को फैसला लेना होगा. तभी जाकर शहर की सफाई व्यवस्था की हालत सुधरेगी.
लीला राम
क्या कहते हैं पार्षद
यहां पूरी तौर से अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति कायम है. निगम के सफाई कर्मचारी को अधिकारियों के आवास पर ड्यूटी दे दिया गया है. वार्डों में मजदूर देने के नाम पर हर बार टालमटोल किया जाता है. कई बार सफाई कर्मचारियों की सूची व संख्या मांगने पर उपलब्ध नहीं कराया जाता है. बड़े वार्डों में एक ही मापदंड अपनाया जाता है. समय सुधार के लिए पहल निगम में होनी चाहिए. समय परिवर्तन से सभी को फायदा है.
ओमप्रकाश सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर 33
शहर में कई ऐसी गलियां हैं, जहां लोगों के घरों तक ठेला से कचरा कलेक्शन नहीं कराया जा सकता है. इसके लिए दो चक्का का ठेला ही कामयाब हो सकेगा. उपलब्ध कराया गया ठेला भी कर्मचारी के अभाव में नहीं चलाया जा रहा है. रात्रि पाली में सफाई व्यवस्था होने व सड़क पर खुले में कचरे फेंकने पर जुर्माना के प्रावधान से ही सुधार की संभावना दिखती है.
प्रमिला देवी पटवा, पार्षद, वार्ड नंबर 49
बोर्ड से पारित हो चुका है सफाई का समय परिवर्तन
निगम बोर्ड से शहर में रात्रि पाली में सफाई शुरू करने के लिए प्रस्ताव पारित किया जा चुका है. पिछले दिनों बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने लाया था. डिप्टी मेयर ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि रात्रि में ही सफाई होने के बाद सुबह शहर पूरी तौर से क्लीन दिखेगा. इस दौरान अधिकारियों का कहना था कि तुरंत इस व्यवस्था को कायम करना संभव नहीं है, क्योंकि वर्षों की आदत को बदलने व सफाई कर्मचारियों को रात्रि पाली में काम कराने के लिए तैयार भी करना होगा.

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