गया: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के शिक्षा पीठ में शिक्षकों व रिसर्च स्कॉलरों के लिए आयोजित योग शिविर को संबोधित करते हुए योग विषय विशेषज्ञ डॉ सनत कुमार शर्मा ने कहा कि कर्म में जो कौशल प्रदान करे, वही योग है. चित की वृत्तियों को योग ही नियंत्रित करता है. जीवन में योग का महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने कहा कि प्रकृति व पुरुष का मिलन आनंद देता है. आनंद से मन उत्पन्न होता है और मन में अहंकार उत्पन्न होता है. लेकिन, अहंकार पर योग ही अंकुश लगाता है. अपने आप को मन से जोड़ना, शरीर से जोड़ना, प्रवृत्ति से जोड़ना व अपने आप को परा शक्तियों से जोड़ने में योग काफी सहायक साबित होता है. पंच तत्व का समन्वय रूप ही योग कहलाता है.
इस दौरान सीयूएसबी के प्रतिकुलपति प्रो (डॉ) ओमप्रकाश राय ने कहा कि योग हमें संयमित रखता है. व्यक्ति अगर अपने आप को संयमित रखे व विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक सोच रखे तो वह सफल हो जायेगा. हमें अपने अंदर बैठे अहंकार को मारना है. लेकिन, यह तभी संभव है, जब हम योग का अध्ययन गहराई से करते हैं. योग से दूर रहनेवाले लोग हमेशा यह सोचते हैं कि वह कुछ नहीं कर सकते हैं. लेकिन, हर व्यक्ति में असीम शक्ति होती है. योग उसी असीम शक्ति को उभार कर सामने लाता है. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक मदन मोहन मालवीय व पतंजलि योग संस्थान के प्रमुख रामदेव बाबा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने इच्छा रहित कार्य किया और इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया. व्यक्ति में सकारात्मक क्रिया हो तो वह सृजन में भागीदार होता है और समाज को दिशा देता है.
इससे पहले सोमवार से शुरू होनेवाले पांच दिवसीय योग कार्यशाला का शुभारंभ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के योग विशेषज्ञ डॉ योगेश कुमार भट्ट, सीयूएसबी की शिक्षा विभाग की डीन प्रो रेखा अग्रवाल, चीफ प्रोक्टर प्रो कौशल किशाेर व योग विशेषज्ञ डॉ सनत कुमार शर्मा ने दीप जला कर किया.
इस कार्यशाला में शिक्षा पीठ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ तपन कुमार बसंतिया, सहायक प्रोफेसर डॉ मितांजलि साहू, डॉ रिंकी, डॉ तरुण त्यागी, चंद्रप्रभा पांडे, डॉ प्रज्ञा गुप्ता, डॉ रवींद्र कुमार, मोहम्मद मुज्जमिल हसन, डॉ जितेंद्र कुमार, स्वाति गुप्ता, राम अवध व अवधेश कुमार सहित महाराष्ट्र, उतर प्रदेश, उड़ीसा व बिहार के शैक्षणिक संस्थानों से आये रिसर्च स्कॉलर उपस्थित थे.
