अब तक मलेरिया के 524 मरीज आये सामने, तीन प्रखंडों में स्थिति खराब

गया : जिले में इन दिनों मलेरिया महामारी के रूप में है, हालांकि अभी तक इस बीमारी की वजह से किसी की मौत नहीं हुई है. लेकिन, स्थिति चिंताजनक है. अभी तक 524 मलेरिया के मामले दर्ज किये गये हैं, इसमें 315 मामले जून में ही आये थे. बारिश के बाद से ही मलेरिया के […]

गया : जिले में इन दिनों मलेरिया महामारी के रूप में है, हालांकि अभी तक इस बीमारी की वजह से किसी की मौत नहीं हुई है. लेकिन, स्थिति चिंताजनक है. अभी तक 524 मलेरिया के मामले दर्ज किये गये हैं, इसमें 315 मामले जून में ही आये थे. बारिश के बाद से ही मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.
ग्रामीण स्तर पर बेहतर व्यवस्था नहीं होने की वजह से अधिक मामले सामने आ रहे हैं. इस महामारी से निबटने की जिम्मेदारी जिस विभाग के पास है, वह खुद लंबे समय से बीमार है. 166 स्वीकृत पदों में 144 पद खाली है. नगर प्रखंड, परैया व टिकारी प्रखंड के इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं. इन इलाकों में यह स्थिति लंबे समय से है. पहाड़ी क्षेत्रों में पानी जमा होने की वजह से पूरे साल यहां मच्छरों का वास होता है. इन मच्छरों के काटने से ही लोगों को बीमार हो रहे हैं.
नगर प्रखंड है अधिक प्रभावित
जिले में मुख्यालय के नजदीक नगर प्रखंड की स्थिति सबसे खराब है. अब तक आये 524 मामलों में से 195 मामले नगर प्रखंड के ही हैं. गौरतलब है कि बीते साल भी यहां से ही सबसे अधिक 925 मामले दर्ज किये गये थे. मलेरिया विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नगर प्रखंड में जगन्नाथ पहाड़ी इलाका मलेरिया के मच्छर पाया जाने वाले क्षेत्र है. यहां पहाड़ों में हुए खनन के बाद एक बड़े क्षेत्र में जलभराव है. यहीं से मच्छरों का प्रजनन होता है. अधिकारियों के मुताबिक इन जलजमाव वाले इलाके में अगर पानी को निकालने के उपाय कर दिये जायें तो स्थिति में जरूर सुधार हो जायेगा.
टिकारी और परैया भी रेड जोन में
नगर प्रखंड के क्षेत्रों से सटे होने की वजह से टिकारी और परैया प्रखंड भी मलेेरिया से प्रभावित इलाकों की सूची में रेड जोन में है. आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अभी तक टिकारी में 95 और परैया में 94 मामले सामने आ चुके हैं. बीते साल भी टिकारी से 167 अौर परैया से 504 मलेरिया के मामले सामने आये थे. मलेरिया विशेषज्ञों के अनुसार, नगर प्रखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से सटे होने की वजह से यहां से मच्छर टिकारी और परैया के गांवों में भी पहुंच जाते हैं. इसलिए इन दोनों इलाके में भी स्थिति अच्छी नहीं है.
मुख्यालय में 160 मरीज दर्ज
जय प्रकाश नारायण अस्पताल स्थित जिला मलेरिया विभाग में इस साल अभी तक 160 मामले सामने आये हैं. विभाग के पदाधिकारियों के मुताबिक यह आंकड़ा केवल शहरी क्षेत्र का नहीं है. मुख्यालय होने की वजह से यहां से शहर के अलावा आसपास के जिले से भी लोग इलाज कराने आते हैं. सामान्य बुखार होने पर लोग जय प्रकाश नारायण अस्पताल आते हैं, लेकिन जांच के बाद अगर मलेरिया की पहचान हो जाती है, तो उनका इलाज यहीं से हो जाता है.
महामारी के रूप में फैले इस बीमारी से निबटने के लिए जिला मलेरिया विभाग के पास केवल 22 कर्मचारी हैं. इनमें भी फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या महज नौ है. विभाग के पदाधिकारियों के मुताबिक, पूरा काम एएनएम के भरोसे हो रहा है. ग्रामीण स्तर पर कहीं भी कोई विशेषज्ञ नहीं है.
पीएचसी लेवल पर एएनएम केवल मलेरिया पाॅजिटिव व निगेटिव की जांच करती है. इसके बाद दवा दे दी जाती है. लेकिन यह जरूरी है कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों की नियुक्ति हो. इनके होने से बीमारी की श्रेणी का पता चल सकेगा. वहीं, मलेरिया इंस्पेक्टर के 9 पदों में से केवल तीन पर कर्मचारी हैं, इसकी वजह से भी ग्रामीण इलाके में निरीक्षण नहीं हो पाता है.

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