Darbhanga News: शहर के ऐतिहासिक जलाशयों हराही, गंगासागर और दिग्घी तालाब की सुरक्षा और अस्तित्व को लेकर नागरिक अब लामबंद हो गए हैं. ‘तालाब बचाओ अभियान’ के बैनर तले गुरुवार को बुडको (BUDCO) की कार्यशैली के खिलाफ एक विशाल पदयात्रा निकाली गई. सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर इन ऐतिहासिक धरोहरों का ‘श्राद्ध और पिंडदान’ एक साथ किया जा रहा है.
गंगासागर से समाहरणालय तक पदयात्रा
पदयात्रा की शुरुआत ऐतिहासिक गंगासागर तालाब से हुई, जिसे पटना उच्च न्यायालय की अधिवक्ता मंजू झा सहित अन्य प्रबुद्धजनों ने झंडी दिखाकर रवाना किया. यह यात्रा दोनार, अललपट्टी और बेंता होते हुए समाहरणालय पहुंची. पदयात्रा में छात्रों, महिलाओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर तालाबों के अतिक्रमण और गलत तरीके से हो रहे निर्माण कार्य के खिलाफ नारे लिखे थे.
‘वेटलैंड्स नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां’
समाहरणालय स्थित धरनास्थल पर आयोजित सभा में अभियान के संयोजक नारायण जी चौधरी ने बुडको पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर वेटलैंड्स रूल्स 2017, एनजीटी (NGT) और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की सरेआम अवहेलना की जा रही है. ज्ञापन में कहा गया कि बुडको जिस कार्य को सौंदर्यीकरण कह रहा है, वह असल में इन तालाबों की पारिस्थितिकी की हत्या है.
डीएम को सौंपा ज्ञापन, काम रोकने की मांग
सभा के बाद डीएम को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया. इसमें मांग की गई कि बुडको द्वारा तालाबों में किए जा रहे कंक्रीट के निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए. साथ ही गंगासागर, दिग्घी और हराही तालाब का सरकारी स्तर पर सीमांकन कराया जाए. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि ऐतिहासिक धरोहरों को नहीं बचाया गया, तो आंदोलन और तेज होगा. कार्यक्रम का संचालन अजीत कुमार मिश्र और डॉ. अमर जी कुमार ने किया, जबकि पदयात्रा में जिले के कई गणमान्य सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए.
दरभंगा से सतीश कुमार की रिपोर्ट
