Darbhanga News: जाले प्रखंड क्षेत्र में रसोई गैस (LPG) की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती किल्लत ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. गैस सिलेंडर के लिए मची आपाधापी के बीच लोग अब मजबूरी में पारंपरिक ईंधन की ओर रुख कर रहे हैं. इसके चलते बाजार में कोयला और लकड़ी की मांग में अचानक भारी तेजी आई है, जिससे इनके दाम आसमान छूने लगे हैं.
1000 रुपये के पार पहुंची जलावन की लकड़ी
बाजार में जलावन की लकड़ी की कीमत अब 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. कुछ समय पहले तक यह दर 200 से 300 रुपये कम थी. सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी विकट है, जहां जलावन 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है. मांग इतनी अधिक है कि आपूर्ति कम पड़ने लगी है, जिससे कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है.
कोयले की कीमतों में भी लगी आग
लकड़ी के साथ-साथ कोयले के दाम भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं. पहले जो कोयला 1800 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल मिलता था, उसका भाव अब बढ़कर 2200 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.
बाजार का हाल:
होटल और ढाबे: गैस की कमी के कारण चाय-नाश्ते की दुकानों और छोटे होटलों में फिर से चूल्हे सुलगने लगे हैंङ
विक्रेताओं का पक्ष: दुकानदारों का कहना है कि पिछले दो महीनों में लकड़ी और कोयले की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है.
जनता की मजबूरी: स्थानीय लोगों का कहना है कि सिलेंडर न मिलने के कारण वे पुराने तरीकों से खाना पकाने को मजबूर हैं.
दरभंगा के कमतौल से शिवेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट
