Darbhanga News: प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में मनरेगा योजनाओं में पारदर्शिता के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है. सरकारी नियमों के अनुसार, हर कार्यस्थल पर योजना का विवरण देने वाला कंक्रीट का सूचना बोर्ड या शिलापट्ट लगाना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ बोर्ड लगाने के बजाय दीवार पर चूने से नाम लिखकर खानापूर्ति की जा रही है. सुपौल पंचायत समेत कई जगहों पर बोर्ड के नाम पर आवंटित 4 से 5 हजार रुपये की राशि का गबन कर लिया गया है.
सरकारी धन की लूट
नियम के मुताबिक, योजना की शुरुआत से पहले कार्यस्थल पर लागत, मजदूरी, मस्टर रोल संख्या और समाप्ति तिथि अंकित कंक्रीट बोर्ड लगाना होता है. इसके लिए प्रति बोर्ड सरकारी कोष से बजट मिलता है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सुपौल पंचायत सहित दर्जनों पंचायतों में शिलापट्ट गायब हैं. निजी घरों, स्कूलों की चहारदीवारी और ईदगाहों पर महज पेंट से योजना का नाम लिखकर बजट की राशि निकाल ली गई है. स्थानीय ग्रामीण चन्द्र विजय साहू ने आरोप लगाया कि पीओ, जेई और मुखिया की मिलीभगत से यह भ्रष्टाचार हो रहा है.
दोषियों से होगी रिकवरी: पीओ
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि हर योजना की जियो टैगिंग के साथ बोर्ड की फोटो पोर्टल पर अनिवार्य की जाए और गबन करने वालों पर एफआईआर दर्ज हो. इस संबंध में कार्यक्रम पदाधिकारी (PO) महेश भगत ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है. मनरेगा में कंक्रीट बोर्ड का ही प्रावधान है. उन्होंने जेई को स्थल जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ बोर्ड नहीं लगा है, वहाँ भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाएगी और दोषियों से राशि की रिकवरी की जाएगी.
दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट
