Darbhanga News: जिले के बिरौल अनुमंडल अंतर्गत सुपौल बाजार, रामनगर चौक और कोठीपुल चौक स्थित कई साइबर कैफे में आधार कार्ड बनाने और बायोमेट्रिक अपडेट के नाम पर अवैध वसूली का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है. नियमों के मुताबिक, आधार से जुड़ा कोई भी कार्य केवल सरकारी कार्यालय परिसर में ही संचालित हो सकता है, लेकिन यहां निजी दुकानों में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रत्येक व्यक्ति से 300 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक मनमाने तरीके से वसूले जा रहे हैं.
सरकारी केंद्रों के बजाय कैफे में सज रही दुकान
नियमों के अनुसार, आधार नामांकन केंद्र केवल बीडीओ कार्यालय या अन्य चिन्हित सरकारी भवनों में ही चल सकते हैं. हालांकि, बिरौल में जिस व्यक्ति को आधार आईडी मिली है, वह तय केंद्र के बजाय अलग-अलग साइबर कैफे में समय निर्धारित कर काम कर रहा है. यूआईडीएआई (UIDAI) के स्पष्ट निर्देश हैं कि नया आधार नामांकन पूरी तरह निशुल्क है, जबकि बायोमेट्रिक अपडेट के लिए 125 रुपये और डेमोग्राफिक सुधार के लिए 75 रुपये का शुल्क निर्धारित है. इसके बावजूद, गरीब और अनपढ़ लोग जानकारी के अभाव में ठगी का शिकार हो रहे हैं. रसीद मांगने पर संचालक टाल-मटोल करते हैं, जिससे डेटा की गोपनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं.
अंतरराज्यीय गिरोह से भी जुड़े हैं तार
गौरतलब है कि बीते 28 अप्रैल को आरा की भोजपुर पुलिस ने बिरौल थाना क्षेत्र के हाटी-कोठी चौक पर छापेमारी कर फर्जी आधार बनाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया था. इस दौरान ग्यारी गांव के फूल हसन को लैपटॉप और आइरिस स्कैनर के साथ गिरफ्तार किया गया था. जांच में पता चला कि इस गिरोह के तार झारखंड और ओडिशा तक जुड़े हैं. इस कार्रवाई के बावजूद इलाके में अवैध रूप से आधार का काम बंद नहीं हुआ है.
एसडीओ ने दिए जांच के निर्देश
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए एसडीओ शशांक राज ने कहा कि निजी कैफे में आधार का काम करना दंडनीय अपराध है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अधिकृत सरकारी केंद्र ही वैध हैं. जांच के बाद दोषी संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाएगी. स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से विशेष टीम बनाकर इन कैफे की जांच करने और केंद्रों पर सरकारी दर की सूची चस्पा करने की मांग की है.
दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट
