दरभंगा : कड़ाके की ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. शाम होते ही चौक-चौराहे वीरान हो जा रहे हैं. लोग अपने-अपने घरों में सिमट रहे हैं. रविवार की शाम 6.30 बजे पूरा बाजार एक तरह से खामोश हो गया था. चौक-चौराहे सुनसान थे. इक्का-दुक्का लोग जरूरी काम को लेकर आ-जा रहे थे. बाजार की दुकानों का शटर शाम होते ही गिरा दिया गया था.
शाम होते ही वीरान हुए शहर के चौक-चौराहे
दरभंगा : कड़ाके की ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. शाम होते ही चौक-चौराहे वीरान हो जा रहे हैं. लोग अपने-अपने घरों में सिमट रहे हैं. रविवार की शाम 6.30 बजे पूरा बाजार एक तरह से खामोश हो गया था. चौक-चौराहे सुनसान थे. इक्का-दुक्का लोग जरूरी काम को लेकर आ-जा रहे थे. […]

आयकर चौराहा पूरी तरह शांत था. आसपास की सभी दुकानें बंद हो गयी थी. एक मात्र पान की दुकान पर चार-पांच लोग खड़े थे. इनलोगों के बीच चर्चा का विषय ठंड था. लोग आपस में बात कर रहे थे कि इस बार तो ठंड अपना असर दिखाके मानेगा. इक्का-दुक्का गाड़ियां बीच-बीच में आ-जा रही थी. सुनसान चौक पर जहां-तहां आवारा कुत्ते पांव में सिर डाले सो रहे थे. ठंड का असर जानवरों पर भी साफ दिख रहा था. आयकर चौराहा सामान्य दिनों में 11 बजे रात तक गुलजार रहता था.
देर रात तक लोग यहां बातचीत करने में जुटे रहते थे. रविवार का नजारा इसके साफ उलट देखा गया. लोहिया चौक से दूर-दराज जाने वाले लोग देर शाम तक गाड़ियां पकड़ते हैं. इस कारण इस चौक पर देर रात तक लोगों की उपस्थिति रहती है. रविवार की शाम सात बजे चौक पूरी तरह सुनसान हो गया था. यहां तक कि सड़क किनारे रिक्सा लगाकर यात्री की प्रतीक्षा करने वाले भी नहीं दिख रहे थे. दूर-दराज के गांव जाने वाले भूले-भटके लोग गाड़ियां नहीं देख आश्रय की तलाश में शहर की ओर जा रहे थे. कंपकंपाती ठंड के बीच कभी-कभी एक-दो गाड़ियां गुजर जाती थी.