दरभंगा : दोपहर करीब एक बजे सूर्यदेव का दर्शन हुआ तो लगा कि अब इस ठिठुरन से निजात मिलेगी, लेकिन शाम ढलते ही लोगों की उम्मीद पर पानी फिर गया. मौसम और ठंडा हो गया. घर में रजाई के अंदर भी पांव गर्म नहीं हो रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे बंद कमरे में भी बर्फीली हवा चल रही हो. शुक्रवार को ठंड में और इजाफा हो गया. सुबह में मौसम तो साफ था, लेकिन कनकनी गुरुवार की तुलना में अधिक महसूस हो रही थी. इस वजह से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया.
बच्चे व बूढ़ों पर शामत: वैसे तो इस शीतलहर से सभी लोग परेशान हैं, लेकिन बच्चे व बूढ़ों के लिए यह शामत बनकर उतर आया है. इस वजह से अभिभावक भी खासे परेशान हैं. स्कूलों में छुट्टी नहीं होने की वजह से कलेजे पर पत्थर रख बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं. वहीं गरम कपड़ों के लबादे में लिपटे होने के बावजूद बूढ़ों की हालत पतली है.
तेज हुई पछुआ, बढ़ी कनकनी
पिछले तीन दिनों से हल्की पछुआ हवा ने अपनी रफ्तार तेज क
र ली. इसके साथ ही कनकनी काफी बढ़ गयी. इस वजह से मजदूर तबके के लोग काफी परेशानी में हैं. खासकर रिक्सा-ठेला चालक रोजी-रोटी के लिए जान दावं पर लगाये हुए हैं.
दरभंगा जंकशन, कादिराबाद बस स्टैंड, लहेरियासराय स्टैंड, डीएमसीएच आदि स्थानों पर पेट की ज्वाला शांत करने के लिए इस शीतलहर में इस तबके के लोग जद्दोजहद कर रहे हैं. अभी तक प्रशासन की ओर से खासकर शहरी क्षेत्र में अलाव का प्रबंध नहीं किया गया है. प्रशासन मौसम के बदले पारा के मीटर की ओर देख रहा है.
