दरभंगा : स्नातक तृतीय खंड के परीक्षार्थियोंे को प्रवेश पत्र उपलब्ध करवाने के लिए लनामिवि प्रशासन द्वारा की गयी व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है. इसका खामियाजा फिलवक्त कॉलेज प्रशासन को झेलना पड़ रहा है. किसी कारणवश जिन छात्रों का प्रवेश पत्र विवि प्रशासन कॉलेज प्रशासन या छात्रों की गलती के कारण निर्गत नहीं हो सकी है. ऐसी स्थिति में प्रशासन यानि प्रधानाचार्य को ही छात्रों का कोपभाजन बनना पड़ रहा है.
सर, 145 छात्रों काे नहीं मिला एडमिट कार्ड
दरभंगा : स्नातक तृतीय खंड के परीक्षार्थियोंे को प्रवेश पत्र उपलब्ध करवाने के लिए लनामिवि प्रशासन द्वारा की गयी व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है. इसका खामियाजा फिलवक्त कॉलेज प्रशासन को झेलना पड़ रहा है. किसी कारणवश जिन छात्रों का प्रवेश पत्र विवि प्रशासन कॉलेज प्रशासन या छात्रों की गलती के कारण निर्गत नहीं हो […]

इसकी एक बानगी बुधवार को देखने को मिली. जब आरबीएस कॉलेज अंदौर समस्तीपुर के प्रभारी प्रधानाचार्य डा. शौकत अख्तर अपने कॉलेज के एक कर्मी के साथ हांफते हुए परीक्षा नियंत्रक के पास आये. आते ही उन्होंने परीक्षा नियंत्रक से कहा सर, मेरे कॉलेज के 145 छात्रों का प्रवेश पत्र नहीं मिला है. किसी तरह से कॉलेज से जान बचाकर इस शर्त्त पर विवि पहुंच सके हैं कि तुम लोगों को 5 बजे शाम तक किसी भी हाल में प्रवेश पत्र उपलब्ध करवा देंगे.
अगर प्रवेश पत्र उन छात्रों को नहीं दिला पायेंगे तो मेरा कॉलेज जाना मुश्किल होगा. पूरे दिन छात्रों से जुझना पड़ा है. वहां के स्थानीय थाना, बीडीओ व सीओ के सहयोग से इतनी सफलता मिली कि किसी तरह विवि तक पहुंच सका हूं. हालांकि परीक्षा नियंत्रक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रवेश पत्र शाखा के कर्मी गणेशकांत को बुलाकर पूछताछ की तो उसने बतायाकि गड़बड़ी के बावत प्रकाशक से पूछताछ की जाये. वही प्रवेश पत्र उपलब्ध करवाया है. प्रकाशक ने ही प्रवेश पत्र दिया साथ ही कॉलेज के प्रतिनिधि को उपलब्ध करवा दिया. अंत में उसकी वैकल्पिक व्यवस्था परीक्षा नियंत्रक ने कर दिया. तब जाकर प्रभारी प्राचार्य ने राहत की सांस ली. ऐसी स्थिति अन्य कॉलेजों में भी है. वैसे ऐसी स्थिति होना भी स्वभाविक हैं क्योंकि 90 कॉलेजों के करीब एक लाख छात्रों को प्रवेश पत्र उपलब्ध करवाने के लिए विवि प्रशासन ने महज दो दिनों का ही समय दे सकी.