प्रभू की भक्ति करने वाला माया से बचता है बेनीपुर. भागलपुर कुप्पाघाट से पधारे संत स्वामी कमलानन्द महाराज ने कहा कि जो प्रभु परमात्मा की भक्ति करता है, वह माया से बचता रहता है. जिस तरह सूर्य के उदित होने पर अंधकार नहीं रह पाता है उसी तरह ईश्वर भक्त के सामने माया की कोई कला काम नहीं करती है. उन्होंने कहा कि विभिन्न विद्वानों ने निष्काम भाव से साधना करते रहने पर ही बल दिया है. गीता में भगवान कृष्ण ने कहा कि ”करमण्ये वाधिकारस्य मा फलेसु कदाचन्; उसी तरह महर्षि मेही परमहंस जी कहते है यहि सराय मंह नीज नहीं कोई अर्थात निष्काम भाव से साधना करने पर माया के सभी प्रकोप से साधक बच जाते है.
प्रभू की भक्ति करने वाला माया से बचता है
प्रभू की भक्ति करने वाला माया से बचता है बेनीपुर. भागलपुर कुप्पाघाट से पधारे संत स्वामी कमलानन्द महाराज ने कहा कि जो प्रभु परमात्मा की भक्ति करता है, वह माया से बचता रहता है. जिस तरह सूर्य के उदित होने पर अंधकार नहीं रह पाता है उसी तरह ईश्वर भक्त के सामने माया की कोई […]
