सात साल से भवन बनकर तैयार, नहीं किया जा रहा उपयोग

सात साल से भवन बनकर तैयार, नहीं किया जा रहा उपयोग फोटो::::::1,2,3,4परिचय : मनोरोग विभाग वार्ड, कैंसर वार्ड, चर्मरोग वार्ड में संचालित आईसीयू, कैदी वार्डवर्ष 2008 में डीएमसीएच के पांच नये वार्ड का हुआ था उदघाटननये वार्डों में मरीजों को नहीं किया जा रहा भर्तीएमसीआइ ने भी दर्ज की थी आपतिकई विभागों में पीजी का […]

सात साल से भवन बनकर तैयार, नहीं किया जा रहा उपयोग फोटो::::::1,2,3,4परिचय : मनोरोग विभाग वार्ड, कैंसर वार्ड, चर्मरोग वार्ड में संचालित आईसीयू, कैदी वार्डवर्ष 2008 में डीएमसीएच के पांच नये वार्ड का हुआ था उदघाटननये वार्डों में मरीजों को नहीं किया जा रहा भर्तीएमसीआइ ने भी दर्ज की थी आपतिकई विभागों में पीजी का नामांकन ठपप्रतिनिधि, दरभंगा. डीएमसीएच के डॉक्टरों की हमेशा शिकायत रहती है कि सरकार की ओर से बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं करायी जा रही है. चाहे वह भवन हो या फिर उपकरण. पर जब सरकार ने सुविधाएं उपलब्ध करा दी तो सात साल से उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है. इसका खामियाजा यहां के मरीजों को भुगतना पड़ता है. बता दें कि सरकार ने डीएमसीएच में सात साल पहले 5 वार्डों के नये भवनों का निर्माण कराया. भवन निर्माण पूरा होने के बाद पीडब्लूडी और डीएमसीएच प्रशासन के बीच इस मामले को लेकर जिच चलने लगा. डीएमसीएच ने पीडब्लूडी पर आरोप लगाया कि भवनों का निर्माण मानक के अनुरूप नहीं कराया गया है. दूसरी ओर पीडब्लूडी का कहना है कि निर्गत नक्शा के आधार पर भवनों का निर्माण कराया गया है. यह आरोप प्रत्यारोप पिछले कई सालों तक चला. इस आरोप प्रत्यारोप में मरीजों का नुकसान हुआ. स्थिति यह है कि आज तक इन भवनों का उपयोग डीएमसीएच प्रशासन नहीं कर रहा है. नये भवनों से अब पलास्टर झड़ने लगे है. दीवाल से ईटें निकल रही है. उधर, ऐसे वार्डो के चालू नहीं होने पर एमसीआइ ने भी आपत्ति दर्ज करायी. एमसीआइ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई वार्डों में मरीजों को भर्ती नहीं लिया जा रहा है. वर्ष 2008 में हुआ था उदघाटनकरीब 5 करोड़ की लागत से चार वार्डों के भवनों का निर्माण कराया गया था. इन चार भवनों में मनोरोग वार्ड, चर्मरोग वार्ड, कैदी वार्ड, पोस्टमार्टम भवन और कैसर वार्ड शामिल है. इनमें से चार वार्डो का निर्माण 2007 में हो गया था. इन भवनों का उदघाटन तत्कालीन भवन निर्माण मंत्री मोनाजिर हसन ने 2008 में किया था. इसमें से डीएससी प्रशसन के प्रयास से पोस्टमार्टम भवन 2010 में चालू हो गया. कैंसर वार्ड के भवन का उद्घाटन अभी तक नहीं हुआ है. गिर रहे प्लास्टर, दीवारों से निकल रहे ईंटवर्तमान में इन भवनों का हाल यह है कि भवनों के ईंट दीवालों से निकल रहे हैं. खिड़कियों से पल्ले और शीशे गायब हो गए हैं. टाइल्स दीवालों से झड़ चुके हैं. टाइल्सों व भवनों का रंग रोगन की चमक समाप्त हो चुका है. मनोरोग वार्ड दवा भंडार बन चुका है. कैदी वार्ड पुलिस शिविर में तबदील हो चुका है. चर्मरोग वार्ड में मेडिसिन वार्ड का आइसीयु खुल गया है. 30 बेडों वाला कैंसर वार्ड भी है शामिल मनोरोग वार्ड में 15, कैदी वार्ड में 10, चर्मरोग वार्ड में 30 और कैंसर वार्ड में 30 बेडों वाले मरीजों का भवन बना है. कहते है अस्पताल अधीक्षकडॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि पीडब्लूडी ने मानक के अनुरूप भवन का निर्माण नहीं कराया था. मसलन मनोरोग वार्ड के परिसर का घेराव नहीं कराया. उस समय वहां बिजली की वायरिंग भी नहीं हुई थी. इसके अलावा कई और तकनीकी कारणों से मरीजों की भर्ती नहीं शुरू की जा सकी.

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