\\\\टं३३ी१त्र/ू/रभवन व उपस्कर में अव्वल, कचरा प्रबंधन में फिसड्डी \\\\टं३३ी१त्र/रसफरनामा : नगर निगम 2015 का फोटो संख्या- 24परिचय- नगर निगम कार्यालय भवन की तसवीर दरभंगा : वर्ष 2015 अलविदा को है. इस वर्ष में दरभंगा नगर निगम के क्रियाकलापों पर विचार मंथन के बाद ऐसा प्रतीत होता हे कि इस अवधि में 68 लाख के नये अत्याधुनिक भवन एवं करीब 2.36 करोड़ के उपस्करों की खरीददारी की. इन दो मामलों में समृद्धि के बावजूद जनसरोकार से जुड़े कचरा प्रबंधन के मामले (डंपिंग ग्राउंड को जमीन) का निदान नहीं होने के कारण प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत योजना पर सवाल उठता ही दिख रहा है. वर्ष के पूर्वार्द्ध में आइएएस नगर आयुक्त महेंद्र कुमार ने निगम कार्यालय को हाइटेक बनाने में लगे रहे. 68 लाख से बने नये प्रशासनिक भवन को उन्होंने अत्याधुनिक ढंग से सजवाया. अपने कार्यालय कक्ष के अलावा सभी कर्मियों को गोदरेज कंपनी का टेबुल-कुर्सी उपलब्ध करवाया. इतना ही नहीं, करीब एक करोड़ की लाग से निगम गोदाम में वाहनों के रखने को दो बड़े शेड सहित परिसर का सौंदर्यीकरण कराया गया. परिसर में चार डीलक्स शौचालय भी बनाये गये. जलनिकासी को बने बड़े नाले राज्य योजना मद से पीडब्ल्यूडी पथ में गायत्री मंदिर से दारूभट्ठी चौक, दुर्गा होटल के पीछे से गुदरी बाजार होते हुए विद्यापति उच्च विद्यालय तक ढक्कन सहित आरसीसी नाला का निर्माण 11, 50, 39, 060 की लागत से कराया जाना था जो नहीं हुआ. इसी मद की 91.88 लाख की राशि से फैजुल्ला खां मस्जिद से खान चौक तक ढक्कन सहित आरसीसी नाला निर्माण कराया गया. दरभंगा टावर के चारों ओर सभी एप्रोच पथों का पीसीसीकरण सह ढक्कन सहित नाला निर्माण 1, 42, 60, 500 की लागत से पिछले सप्ताह शुरू किया गया है. इसके अलावा रोज पब्लिक स्कूल से हराही तालाब तक नाला निर्माण, 112.287 लाख से हराही तालाब का सौंदर्यीकरण, हराही के पश्चिमी-उत्तरी भिंडा पर घाट निर्माण, पश्चिमी भाग में फ्लैंक निर्माा नहीं हो सका. दोनार से टिनही पुल तक नहीं बना नाला सांसद कीर्ति आजाद एवं जदयू नेता संजय कुमार झा जिस नाला निर्माण को लेकर बढ़-चढ़कर राजनीति की, उसकी प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका. दोनार गुमटी से पांडेय कम्पलेक्स तक 344.735 लाख, पांडेय कम्पलेक्स से कोशी प्रोजेक्ट तक 237.364 लाख एवं कोशी प्रोजेक्ट से टिनही पुल तक 244.715 लाख की स्वीकृति के बाद नगर विकास एवं आवास मंत्री सम्राट चौधरी इसका शिलान्यास किया, फिर भी अबतक काम शुरू नहीं हो सका है. तीस करोड़ खर्च के बावजूद नहीं टपका पानी शहरी जलापूर्ति योजना यहां 2007-08 से चालू है. इस योजना के कार्य एजेंसी पीएचइडी ने विगत सात वर्षों में इस पर 29 करोड़ 68 लाख 25 हजार 500 रुपये खर्च कर चुका है. विगत एक साल में पीएचइडी ने निगम प्रशासन को आधा दर्जन से अधिक बाद लक्ष्मीसागर एवं रहमखां मुहल्ला की योजनाओं को चालू करने का आश्वासन दिया, लेकिन कहीं भी जलापूर्ति में वह विफल रहा. दिसंबर के पहले सप्ताह में हुई निगम बोर्ड की बैठक में पीएचइडी एवं इस योजना के संवेदक किर्लोस्कर एंड ब्रदर्स के खिलाफ निगरानी जांच कराने का निर्णय लिया. शहर के कई सड़कों में लगे 400एलइडी ब्रेडा की ओर से 24 लाख की लागत से आधा दर्जन सड़कों के किनारे एलइडी लाइट लगाये गये. ब्रेडा से कोलकाता केकार्य एजेंसी जीइ कंपनी ने आगामी तीन वर्षों तक रख रखाव की भी जिम्मेवारी ली थी. लेकिन इस योजना का भुगतान अबतक नहीं होने के कारण कार्य एजेंसी इसकी मरम्मत से आंख मोड़े हुए हैं,जबकि कई सड़कों के दर्जनों एलइडी महीनों से खराब है. डंपिंग ग्राउंड की जमीन नहीं कचरा प्रबंधन के लिए डंपिंग ग्राउंड की जमीन खरीदने को करीब 10 वर्ष पूर्व राज्य सरका ने निगम प्रशासन को उपलब्ध करवाया. तबसे वह राशि निगम खाते में पड़ा है. डंपिंग ग्राउंड की जीन नहीं मिलने से सड़क के बाहर जहां-तहां कचरा फेंका जा रहा है. आइएएस नगर आयुक्त महेंद्र कुमार के तबादला के बाद 24 अगस्त को नागेंद्र कुमार सिंह यहां योगदान दिया. इसके बाद संसाधनों की कमी के बावजूद नगर आयुक्त ने दुर्गा पूजा, दीपावली, छठ, मुहर्रम पर मुकम्मल सफाई व्यवस्था से पार्षद एवं शहरवासियों की उम्मीद पर खड़ा उतरने में सफल रहे.
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