मैसूर में भूख-प्यास से बिलबिला रहे 50 रेल स्टाफ

मैसूर में भूख-प्यास से बिलबिला रहे 50 रेल स्टाफ विभाग की अदूरदर्शिता की सजा भुगत रहे बागमती की ड्यूटी पर गये कर्मी विभाग को लगा लाखों का चूना, हलकान हो रहे यात्री दरभंगा : दरभंगा से मैसूर गये रेलवे से जुड़े 50 कर्मी एक सप्ताह से अधिक समय से वहां फंसे हैं. न तो कोई […]

मैसूर में भूख-प्यास से बिलबिला रहे 50 रेल स्टाफ विभाग की अदूरदर्शिता की सजा भुगत रहे बागमती की ड्यूटी पर गये कर्मी विभाग को लगा लाखों का चूना, हलकान हो रहे यात्री दरभंगा : दरभंगा से मैसूर गये रेलवे से जुड़े 50 कर्मी एक सप्ताह से अधिक समय से वहां फंसे हैं. न तो कोई देखने वाला है न ही चिंता करने वाला. भूख-प्यास से अब इनकी हालत बदतर हो गयी है. रेलवे की अदूरदर्शिता के कारण इन कर्मियों के साथ ही रेल यात्री हलकान हो रहे हैं. महकमा को भी इस निर्णय की वजह से लाखों का चूना लग चुका है. उल्लेखनीय है कि चेन्नई में हुई भारी वर्षा के कारण इस क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों का परिचालन अस्त-व्यस्त हो गया. कई गाडि़यों को रद्द घोषित कर दिया गया. इसमें दरभंगा से चलने वाली बागमती एक्सप्रेस को भी कैंसिल कर दिया गया. इस घोषणा के आलोक में मंगलवार को यह गाड़ी मैसूर के लिए नहीं गयी. मजबूरन यात्रियों को अपना टिकट रद्द कराना पड़ा. इससे करीब 20 लाख रुपये का नुकसान विभाग को हुआ है. मैसूर में फंसे कर्मी गत 1 दिसंबर को मैसूर के लिए दरभंगा से 12577 बागमती एक्सप्रेस रवाना हुई. यह ट्रेन जब रास्ते में ही थी तो चेन्नई में अचानक अतिवृष्टि हो गयी. इसने रेल परिचालन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया. इस ट्रेन के पेंट्री कार में 40 कर्मी सवार थे. वहीं एसी तथा सफाई स्टाफ की संख्या लगभग 10 थी. ये लोग विभाग के निर्देशानुसार परिवर्तित मार्ग से गयी ट्रेन में यात्रियों की सेवा करते हुए मैसूर तक पहुंच गये. इसके बाद इस गाड़ी को मैसूर से शनिवार यानि गत 5 दिसंबर को रद्द कर दिया गया. अब यह गाड़ी 12 दिसंबर को दरभंगा के लिए प्रस्थान करेगी. लिहाजा रेक के साथ ये कर्मी भी मैसूर में ही फंस गये. इसमें एसी के इलेक्ट्रीक स्टाफ को छोड़कर प्राय: सभी कांट्रेक्ट पर काम कर रहे हैं या फिर ठेकेदार के अधीन कार्यरत हैं. गाड़ी के साथ ये सभी भी वहीं फंसे हैं. इसमें सवार होकर काम पर गये एक सफाई कर्मी ने दूरभाष पर बताया कि वह अधिक पैसा लेकर नहीं आया. चार दिनों तक तो किसी तरह गुजरा, लेकिन अब खाने के भी लाले पड़ गये हैं. कोई देखनेवाला नहीं है. यही हाल अन्य कर्मियों का भी है. दूरदर्शिता से हुई समस्या जानकारी के मुताबिक चेन्नई में जोरदार बारिश के बाद रेल लाइन बाधित होने की स्थिति में विभाग ने बागमती एक्सप्रेस को भाया रेनीगूंटा मैसूर पहुंचाया. आश्चर्यजनक पहलू यह रहा कि जब यह ट्रेन परिवर्तित मार्ग से गंतव्य तक पहुंच सकती है तो वापस क्यों नहीं लाया जा सकता. हैरत की बात तो यह है कि पूर्व-मध्य रेल ने इसमें सवार अपने स्टाफ की समस्या को भी संजीदगी से नहीं लिया. अगर इसे भाया कटपरी से गुदुर के रास्ते लाया जाता तो यह दरभंगा आ सकती थी. जानकारों का कहना है कि अगर यह ससमय रवाना होने की स्थिति में नहीं थी तो स्पेशल बनाकर ही इसे भेजा जा सकता था. अगर ऐसा किया जाता तो कम से कम मंगलवार को दरभंगा से बेंगलुरू की ओर जानेवाली इस एक मात्र ट्रेन को रद्द नहीं करना पड़ता. .. तो यात्री कम होते परेशान ट्रेन यदि दरभंगा से रद्द नहीं रहती तो सैंकड़ों की संख्या में टिकट वापस नहीं करना पड़ता. इससे विभाग को जहां लाखों का नुकसान उठाने से मुक्ति मिल जाती, वहीं आरक्षण के लिए यात्रियों को दर-दर की ठोकरें नहीं खाना पड़ता. ज्ञातव्य हो कि इस गाड़ी में वेटिंग तक उपलब्ध नहीं है. एसी में भी वेटिंग की लंबी लाइन है. जिन यात्रियों ने महीनों पूर्व आरक्षण करा रखा था, उन्हें विभाग ने पूरा पैसा तो दे दिया लेकिन आगे आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं की. लिहाजा ऐसे यात्रियों के सामने फिर से आरक्षण की समस्या खड़ी हो गयी है. जिसके लिए पूरी तरह विभाग जवाबदेह है. दरभंगा के साथ दोहरा मापदंड वैसे तो रेलवे वर्षों से विशेषकर दरभंगा के यात्रियों के साथ दोहरा मापदंड अपनाती रही है. लेकिन इस मामले में इसने तो हद ही कर दी. उल्लेखनीय है कि पूर्व में रद्द घोषित एक ट्रेन को मुजफ्फरपुर से विभाग ने चलाने की हरी झंडी दे दी पर बागमती को रद्द ही छोड़ दिया. इससे यात्री हलकान हैं. एक मात्र गाड़ी होने की वजह से यात्रियों के सामने कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है. जबकि दरभंगा पूरे समस्तीपुर रेल मंडल में सबसे अधिक तथा पूर्व-मध्य रेल में सर्वाधिक राजस्व देनेवाले स्टेशनों में टॉप थ्री में शामिल है.

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