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\\\\टं३३ी१त्र/ू/रफेरीवालों का ओपीडी में बोलवाला \\\\टं३३ी१त्र/रदरभंगा : डीएमसीएच के केंद्रीय आउटडोर (ओपीडी) में गार्डों की उपस्थिति में नारियल बेचनेवाला सहित भूजावाला फेरी लगाकर सामग्री बेचता है. नाम के लिए ओपीडी में भूतपूर्व सैनिक गार्ड के रुप में तैनात हैं, जबकि ओपीडी में हरेक दिन मरीजों की संख्या करीब 2000 रहती है. फेरीवाला सिर्फ रास्ते पर […]

\\\\टं३३ी१त्र/ू/रफेरीवालों का ओपीडी में बोलवाला \\\\टं३३ी१त्र/रदरभंगा : डीएमसीएच के केंद्रीय आउटडोर (ओपीडी) में गार्डों की उपस्थिति में नारियल बेचनेवाला सहित भूजावाला फेरी लगाकर सामग्री बेचता है. नाम के लिए ओपीडी में भूतपूर्व सैनिक गार्ड के रुप में तैनात हैं, जबकि ओपीडी में हरेक दिन मरीजों की संख्या करीब 2000 रहती है. फेरीवाला सिर्फ रास्ते पर ही नहीं लाइन में लगे मरीजों के पास भी सामग्री बेचने से परहेज नहीं करते हैं. उधर मरीजों को काउंटर पर पूर्जे और डाक्टरों से जांच कराने की अफरा तफरी मची रहती है. गार्ड भी अपने ड्यूटी के प्रति लापरवाह रहते हैं. मेन गेट पर गार्ड नदारद रहते हैं. भीतर मेें ऐसे गार्डों की कमी रहती है. मुख्य रुप से गार्ड दवा भंडार, मेडिसीन और पूर्जे काटनेवाले काउंटर पर एक एक गार्ड पदस्थापित हैं. जो नाकाफी है. सरकार को ऐसे गार्ड पर प्रत्येक माह करीब 6 लाख रुपये खर्च आता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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