नवरात्र में बदल गयी लोगों की दिनचर्या मुंह अंधेरे से ही फूल की तलाश में निकल जाते हैं श्रद्धालुखाने की थाली का बदल गया मेन्यू दरभंगा. शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की आराधना में लीन श्रद्धालुओं की दिनचर्या बदल गयी है. लोगों ने सुबह से शाम मां के नाम सा कर दिया है. सुबह का समय पूजन की तैयारी में जहां बीत जाता है. वहीं पूजा-अर्चना करते हुए दोपहर हो जाता है. इसके बाद मां की आरती से शाम भक्तिमय ही बीतता है. सूर्योदय के बाद घर के लोगों द्वारा कई बार प्रयास करने के बाद जगने वाले भी मुंह अंधेरे बिस्तर छोड़ देते हैं. इसके बाद मां की आराधना के लिए फूल की जुगाड़ में निकल जाते हैं. यही वजह है कि रात दो बजे के बाद से ही गलियों में टार्च की रोशनी चमकने लगती है. इस गली से उस गली फूल की तलाश में लोग भटकते नजर आते हैं. कंक्रीट के जंगल में तब्दिल हो चुके शहर में लोगों के सामने कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है. ये हाल तो उनका है जो दूसरों की बाग में ‘सेंधमारी’ करते हैं. वहीं जिन्हाेंने फूल के पौधे लगा रखे हैं, उन्हें इसकी पहरेदारी करने के लिए बिस्तर छोड़ देना पड़ता है. नवारात्र को लेकर दिनचर्या के साथ ही लोगों के भोजन की थाली का मेन्यू भी बदल गया है. उल्लेखनीय है कि इस अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखते हैं. लिहाजा उनके घर में पूरी निष्ठा का पालन किया जाता है. वहीं जिनके घर में व्रती नहीं भी हैं, उनके घरों में भी तामशी भोजन निष्द्धि रहता है. श्रद्धालुओं की पूरी दिनचर्या में मां की भक्ति ही बसी है. सुबह पूजन के प्रबंध से आरंभ होनेवाले दिन का सामपन रात में आरती के साथ हो रहा है.
नवरात्र में बदल गयी लोगों की दिनचर्या
नवरात्र में बदल गयी लोगों की दिनचर्या मुंह अंधेरे से ही फूल की तलाश में निकल जाते हैं श्रद्धालुखाने की थाली का बदल गया मेन्यू दरभंगा. शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की आराधना में लीन श्रद्धालुओं की दिनचर्या बदल गयी है. लोगों ने सुबह से शाम मां के नाम सा कर दिया है. सुबह का […]
