दरभंगा : मनीगाछी प्रखंड के मनीगाछी निवासी वयोवृद्ध श्याम नारायण ठाकुर को 1934 का भूकंप स्पष्ट याद नहीं है लेकिन वह दहशत आज भी दिल में दफन है. शनिवार को जैसे ही जलजला आया, वो यादें उछलकर बाहर आ गयी.
जीवन के उत्तरार्ध में पहुंच चुके श्री ठाकुर ने बताया कि 1934 में जब भूकंप आया था तो वे काफी छोटे थे. भूकंप का मतलब भी नहीं जानते थे.
मां-बाबूजी को बात करते सुनते थे जो अभी भी कानों में गूंज रही है. उनके भीतर की बेचैनी उस समय उनके चेहरे पर नजर आयी थी. इसे देखकर मैं भी बेचैन हो गया था. आज जब फिर से तेज भूकंप आया है तो खुद भी वैसी ही बेचैनी महसूस कर रहा हूं. आज भूकंप का मतलब समझता हूं.
बेचैनी भी ज्यादा हो रही है. शुक्र है कि उपरवाले ने कम से कम इस क्षेत्र को तबाही से बचा दिया. वरना जितनी लंबी अवधि तक धरती डोलती रही, उसमें क्या होता इसकी कल्पना मात्र से झुरझुरी सी महसूस हो रही है. भगवान फिर कभी ऐसी विपदा न दे.
