दरभंगा (कमतौल) : मंगलमय दिनु आजु हे पाहुन छथि आयल’ , ‘मंगल आजु जनकपुर अति मन भावन हे, मंगल दुल्हा-दुल्हिन परम सोहावन हे’. बिहार में दरंभगा के कमतौल में गुरुवार को अहिल्या स्थान में अगहन विवाह पंचमी पर आयोजित सीताराम विवाहोत्सव के अवसर पर श्रीराम बारात शोभा यात्रा के सिया-पिया निवास परिसर के समीप पहुंचते ही महिला श्रद्धालुओं के मुंह से गीतों के बोल फूटते ही अहल्यास्थान जनकपुर नजर आने लगा. सिया-पिया निवास के द्वार पर बारात के पहुंचते ही ‘ सोने के थरिया सजा ब हे सासु अम्मा, आई गेलो दूल्हा दमाद हे’, ‘अवध नगरिया से ऐयले बरियतिया, जनक नगरिया भइले शोर’, जैसे गाये जाने वाले गीतों ने गुजरे जमाने में हुए राम-सीता विवाहोत्सव की याद ताजा कर दी.
महिला श्रद्धालुओं के हुजूम से कई श्रद्धालु दुल्हा रूपी प्रभु श्री राम के परिछन की तैयारी में जुट गये. इस दौरान ‘ढोल वो नगाड़ा बाजइ, बजइ सहनइया हे, देखन चलु न, सखि रघुबर के बरियतिया हे परिछन चलु ना’, ‘एहन सुंदर मिथिला धाम, पायब नाहि कोनो ठाम, दुल्हा-दुल्हिन सीता-राम जनकपुर में’ आदि गीत गाये. इधर, महिला श्रद्धालु समधी बने दशरथ सहित बारातियों के स्वागत-सत्कार में जुटे रहे. इस बीच महिला श्रद्धालुओं ने ‘पालकी-पालकी शोर कइल रिक्शो न ले अई ल हो, मुछवा टाइट क तिलक लगा क गन्ना छिले अइला हो’, ‘देखे में समधी लागे बेचारु, आधा मरद हौ आधा मेहरारू, इनका के साड़ी पेन्हाउ, पेन्हाउ मेरी सखिया’, सरीखे गीतों से समधी और बारातियों का स्वागत-सत्कार किया.
‘मिलाबा तनि गणना ये महंत बाबा’, ‘आज लोढ़ा से सेकाई इन कर गाल सखियां’, ‘मरवा पर भीड़ भइले भारी, बड़ा रंगदार समधी’ हंसी-ठिठोली और मंगल गीत गाते विवाह की रस्म अदायगी शुरू हुई. पूर्व महंत रामचंद्र शरण दास रामायणी और महंत बजरंगी शरण के नेतृत्व में गणमान्य ग्रामीण राम बरात और विवाहोत्सव की तैयारियों में जुटे रहे. देर रात मंगल गीत के बीच ओठांगर, कन्यादान, सिंदूरदान जैसे कई पारंपरिक विवाह रस्म अदायगी और गीतों को देखने-सुनने के लिए काफी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु की भीड़ लगी रही.
