मामला डीएमसीएच का,डीएम के निर्देश पर अधीक्षक ने शुरू की जांच
दरभंगा : उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल डीएमसीएच का दामन एक बार फिर से दागदार हुआ है. महज एक सप्ताह पहले ही दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बन रहे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का निरीक्षण करने आये केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अश्विनी चौबे ने यहां की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने का भरोसा दिया था. मंत्री के जाने के 10 दिनों के भीतर ही इन दावों की हवा निकल गयी, जब मधुबनी जिले के अंधरामठ थाना निवासी रामलाल चौपाल की बहन तारावती का ऑपरेशन सिर्फ इसलिए नहीं हुआ कि उसने ओटी में बिचौलिये को 10 हजार रुपये नहीं दिये.
बताया जाता है कि 13 अगस्त, 2017 से रामलाल की बहन डीएमसीएच में डॉ अरविंद कुमार के यूनिट में इलाजरत हैं. इस दौरान कई जांच बाहर से कराने पड़े. वहीं हजारों रुपये की दवा भी बाहर खरीदनी पड़ी. इसके बाद डॉ ने 10 नवंबर को तारावती के ऑपरेशन की तारीख तय की. श्री चौपाल बताते हैं कि ऑपरेशन की तैयारी हो गयी, तो डॉक्टर के साथ रहनेवाले एक व्यक्ति ने उन्हें बुला कर कर 10 हजार रुपये देने को कहा. साफ कहा
10 हजार रुपये…
गया कि जबतक पैसे नहीं दोगे ऑपरेशन नहीं होगा. तुम्हें जहां जाना है जाओ. बहन का ऑपरेशन बिना पैसे के नहीं होने पर श्री चौपाल पहले एसएसपी के पास गुहार लगाने पहुंचे, जहां एक कर्मी की सलाह पर डीएम को आवेदन दिया गया. इधर, डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने मरीज के परिजन की शिकायत पर अधीक्षक डॉ संतोष कुमार मिश्र को फोन कर मामले की तहकीकात करने को कहा. इसके बाद आॅर्थो विभागाध्यक्ष के बदले विभाग के एक कनीय चिकित्सक को बुला कर मरीज के परिजन के सामने पूछताछ की गयी.
डीएम के फोन आने पर मामले की जानकारी हुई. मामले की जानकारी के लिए मरीज के परिजन और ऑर्थो विभाग के चिकित्सक डॉ कुणाल शंकर को बुला कर पूछताछ की गयी. पूछताछ में मरीज ने डॉ द्वारा पैसे मांगने की बात से इनकार किया है. मरीज को ब्लड की भी जरूरत थी. इसके कारण ऑपरेशन में इतना समय लगा. मरीज का शुक्रवार को ऑपरेशन किया जायेगा.
डॉ संतोष कुमार मिश्रा, अधीक्षक डीएमसीएच
