कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने निकाला संशोधित आदेश
दरभंगा : मृत सरकारी सेवक की सधवा पुत्रवधु को भी अब अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आश्रित माना जायेगा. बशर्ते मृत सरकारी सेवक के परिवार में उनकी पत्नी के अतिरिक्त अन्य कोई आश्रित शारीरिक अथवा मानसिक रूप से सक्षम अथवा नियोजन के योग्य नहीं होगा. इस आशय का संशोधित आदेश सामान्य प्रशासन विभाग में सरकार के अपर सचिव राजेंद्र राम ने नौ नवंबर को जारी किया है.
उन्होंने कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के ज्ञापांक 13293 दिनांक 5 अक्तूबर 1991 की आश्रितों से संबंधित कंडिका को इस हद तक संशोधित किया है. अपर सचिव ने कई मामलों में मृत सरकारी सेवक के किसी भी आश्रित को अनुकंपा का लाभ संभव नहीं हो पाने से उसके परिवार के सक्षम आश्रित के भरण-पोषण की समस्या को लेकर सम्यक विचारोपरांत निर्णय लेने की बात कही है.
उन्होंने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति की नीति का उद्देश्य सेवक के सेवाकाल में असामयिक मृत्यु के कारण उनके आश्रितों एवं परिवारों के समक्ष भरण-पोषण की समस्या का निराकरण करना है, ताकि आर्थिक तंगी नहीं हो. उन्होंने इस तरह के प्रस्ताव का सरकार के समक्ष विचाराधीन रहने का उल्लेख किया है, जिसपर निर्णय के बाद सधवा पुत्रवधु को भी आश्रित के श्रेणी में लाया गया है.
ये हैं मृतक के आश्रित
दरभंगा. मृत सरकारी सेवक की पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री एवं पुत्र की विधवा पत्नी को वर्ष 1991 के आदेश में आश्रित माना गया है. वर्ष 2005 के आदेश में कुछ शर्तों के साथ दत्तक पुत्र एवं दत्तक अविवाहित पुत्री को इस श्रेणी में लाया गया. वर्ष 2008 में अविवाहित मृत सरकारी सेवक के मामले में उसकी विधवा मां, छोटा भाई, अविवाहित छोटी बहन को अनुकंपा का हकदार बनाया गया. पुन: वर्ष 2010 में सेवक के तलाकशुदा एवं परित्यक्ता पुत्री को आश्रित के श्रेणी में लाया गया. इसके बाद अंतिम संशोधन वर्ष 2014 में किया गया. इसमें मृत सरकारी सेवक के मात्र पुत्रियों के मामले में सशर्त विवाहित पुत्री को भी इस श्रेणी में लाया गया.
योजना को मिल रही गति
दरभंगा. सात निश्चय योजना के तहत जिला के 27 पंचायतों के साठ वार्ड में हर घर नल का जल, घर तक पक्की गली निर्माण योजना त्वरित गति से चलाई जा रही है. पीजीआरओ शत्रुघन कामति ने बताया कि अब तक छह पंचायतों के छह वार्ड में शत प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है. मुखिया अपने क्षेत्रों में सात निश्चय योजना के तहत विकास को गति दे सकते हैं. कई महीनों से इस योजना की राशि पड़ी है.
क्षेत्र में विकास चाहने वाला मुखिया पंचायती राज विभाग से इस बावत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
