Chirag Paswan Pasi Paswan Brahmin Formula उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. पार्टी प्रमुख चिराग पासवान की ओर से यूपी में संगठन को मजबूत करने और चुनावी जमीन तैयार करने की कवायद तेज की जा रही है. चिराग पासवान की नजर उत्तर प्रदेश में मायावती के दलित वोट बैंक पर है। पार्टी इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके साथ ही लोजपा (आर) की नजर योगी सरकार से नाराज चल रहे ब्राह्मण मतदाताओं पर भी है. पार्टी दलितों के साथ ब्राह्मणों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी है.
दलित-ब्राह्मण समीकरण
हाल ही में चिराग पासवान बिहार के भोजपुर में कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के परिजनों से मिलने पहुंचे थे. इसके कुछ दिनों बाद उत्तर प्रदेश में आयोजित लोजपा की एक जनसभा में पार्टी की ओर से नारा दिया गया-“गूंजे धरती-आसमान, जब मिले पंडित-पासी-पासवान.” जनसभा में आगे कहा गया, “जब ब्राह्मण डमरू बजाएगा तो हेलिकॉप्टर उड़ जाएगा.” लोजपा नेता और चिराग पासवान के जीजा अरुणा भारती के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में इस बात की चर्चा तेज हो गई कि लोजपा (आर) यूपी विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतार सकती है. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि चिराग पासवान उत्तर प्रदेश में दलित वोटरों के साथ-साथ ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी के संभावित कोर वोट बैंक के तौर पर साधने की कोशिश कर रहे हैं.
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पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी पर फोकस
लोजपा (रामविलास) के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश में जुटी है. इसके लिए पार्टी पिछले एक साल से जमीनी स्तर पर काम कर रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं. बूथ समितियों का गठन किया जा रहा है और मजबूत संगठनात्मक पकड़ रखने वाले नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि लोजपा (आर) का यूपी चुनाव में मुख्य फोकस पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी पर है. इन क्षेत्रों में पासी और पासवान समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है. इसके साथ ही पूर्वांचल में पार्टी के पास अभी दो लाख से अधिक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क है. इसी तरह सेंट्रल यूपी में भी पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है.
पूर्वांचल में चिराग का दांव
दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए पार्टी पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में दलित चौपालों का आयोजन कर रही है. पार्टी नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कमजोर होने से दलित राजनीति में एक खाली जगह बनी है. लोजपा (आर) इसी जगह को अपने लिए अवसर के तौर पर देख रही है और खुद को एक संभावित विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है.
बिहार से सटे होने की वजह से लोजपा नेताओं को उम्मीद है कि पूर्वांचल में पार्टी के लिए अपना प्रभाव स्थापित करना अपेक्षाकृत आसान होगा. इसके अलावा, इस क्षेत्र में पासी और पासवान समुदाय की बड़ी आबादी को भी पार्टी अपने लिए एक मजबूत आधार के तौर पर देख रही है. उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत है। जाटव समुदाय के बाद पासी समुदाय राज्य के प्रमुख दलित समुदायों में शामिल है.
पंडित-पासी-पासवान, धरती गूंजे आसमान
चिराग पासवान की नजर उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं के साथ-साथ ब्राह्मण वोट बैंक पर भी है. पार्टी की रणनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि ब्राह्मण समुदाय का एक वर्ग योगी आदित्यनाथ सरकार से नाराज है. लोजपा (आर) इसी वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. इसी रणनीति के तहत चिराग पासवान की पार्टी ने यूपी के लिए एक नारा तैयार किया है-“पंडित-पासी-पासवान, धरती गूंजे आसमान।” यह नारा बिहार में पार्टी के चर्चित नारे “धरती गूंजे आसमान, रामविलास पासवान” की तर्ज पर तैयार किया गया है. ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए लोजपा (आर) की ओर से प्रदेश के विभिन्न जिलों के मंदिरों में ‘चाणक्य चौपाल’ आयोजित की जा रही हैं. पार्टी का दावा है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ब्राह्मण समुदाय के साथ संवाद बढ़ाना और पार्टी के सामाजिक आधार को व्यापक बनाना है.
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