Bihar News: पश्चिम चंपारण जिले के बगहा प्रखंड अंतर्गत बांसगांव मंझरिया पंचायत में शौचालय निर्माण योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिससे पंचायत स्तर पर हड़कंप मच गया है.
लोक शिकायत पदाधिकारी ने मानी गंभीर गड़बड़ी
अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजीव कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए तकनीकी सहायक, लेखापाल और पंचायत सचिव के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की है. वहीं, मुखिया बृजेश राम पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है.
फर्जी बिल से भुगतान, फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश
जांच में मेसर्स हैदर अली पर फर्जी बिल के जरिए सरकारी राशि निकासी का आरोप सामने आया है. इसके आधार पर संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा जिला प्रशासन से की गई है. मामले की रिपोर्ट जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जिला पंचायती राज पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी बगहा को भेज दी गई है.
ग्रामीण की शिकायत से खुला मामला
यह पूरा मामला बांसगांव निवासी रामप्रवेश साह की शिकायत के बाद उजागर हुआ. उन्होंने मुखिया बृजेश राम और पंचायत सचिव रामचन्द्र ठाकुर पर मिलीभगत कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.
घटिया निर्माण, जरूरी सुविधाएं भी नदारद
शिकायत के मुताबिक, मंझरिया पोखरा स्थित शिव मंदिर के पास बने शौचालय का निर्माण बेहद घटिया सामग्री से कराया गया. हैरानी की बात यह है कि शौचालय में पानी की टंकी, मोटर और पाइप जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गईं. वहीं, योजना स्थल पर सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
मापी पुस्तिका में हेराफेरी, मजदूरी भुगतान संदिग्ध
परिवाद में यह भी आरोप है कि मापी पुस्तिका में हेराफेरी कर राशि निकाली गई. मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों के वास्तविक कार्य करने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, जिससे मजदूरी भुगतान भी संदेह के घेरे में है.
चोरी का दावा, लेकिन FIR नहीं, BDO की भूमिका पर सवाल
प्रखंड विकास पदाधिकारी, बगहा एक द्वारा सामग्री चोरी होने की बात कही गई, लेकिन इस संबंध में न तो कोई प्राथमिकी दर्ज कराई गई और न ही किसी अधिकारी को सूचना देने का प्रमाण दिया गया. इससे प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं.
योजना पूरी दिखाकर बाद में किया गया भुगतान
परिवाद के अनुसार, 27 फरवरी 2023 को योजना को पूर्ण दिखाकर फाइल बंद कर दी गई थी. इसके बावजूद 9 मई 2023 को मेसर्स हैदर अली को 62,515 रुपये का भुगतान किया गया. यह प्रक्रिया वित्तीय अनियमितता और मनमानी की ओर इशारा करती है.
मिलीभगत से सरकारी राशि का गबन
परिवादी का आरोप है कि तकनीकी सहायक, लेखापाल, पंचायत सचिव और मुखिया ने मिलकर बिना आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए ही सरकारी राशि का गबन किया. इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ, बल्कि ग्रामीणों को योजना का लाभ भी नहीं मिल सका.
BDO पर भी उठे सवाल, कार्रवाई की मांग
शिकायत में प्रखंड विकास पदाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि उन्होंने मामले की गंभीरता से जांच नहीं की और संबंधित लोगों को बचाने का प्रयास किया. उनके खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है.
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