इन जलमीनारों से नहीं बुझती प्यास

परेशानी. बनने पर भी नहीं मिलता पानी सप्लाई साठी, चनपटिया, नौतन, मैनाटांड समेत कई प्रखंडों के गांवों की जलमीनार असंतोष की वजह बेतिया : गांवों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की जिस उम्मीद के साथ जलमीनारें खड़ी हुई, वह उम्मीद आज दरकती नजर आ रही है. कहने व दिखाने को तो यह जलमीनारें उस गांव […]

परेशानी. बनने पर भी नहीं मिलता पानी सप्लाई

साठी, चनपटिया, नौतन, मैनाटांड समेत कई प्रखंडों के गांवों की जलमीनार असंतोष की वजह
बेतिया : गांवों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की जिस उम्मीद के साथ जलमीनारें खड़ी हुई, वह उम्मीद आज दरकती नजर आ रही है. कहने व दिखाने को तो यह जलमीनारें उस गांव के विकास की गाथा लिखती है. जनप्रतिनिधि भी इन जलमीनारों को देख फूले नहीं समाते हैं और श्रेय लेने का एक मौका भी नहीं छोड़ते. लेकिन, यही जलमीनार जब गांव के लोगों के सब्र का बांध तोड़ने लगे तो विकास के यह कार्य असंतोष के भाव पैदा करने लगते हैं. मौजूदा समय में कुछ ऐसा ही है. गरमी के इस मौसम में ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है.
साठी प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के सेमरी पंचायत में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत ढाई करोड़ से बने जलमिनार का लाभ क्षेत्र के लोगों को सही रुप से नहीं मिल पाया. जलमिनार के उदघाटन के बाद पानी की सप्लाई शुरू तो हुई लेकिन कार्य कि गुणवत्ता ऐसी थी कि शुरू होते ही टाय टाय फिस्स हो गई. कहीं मेन सप्लाई लाइन में लिंकेज तो कहीं घर में लगे नल में लिंकेज. यहां तक कि जलमिनार से भी लगातार पानी का रिसाव जारी हैं. जब भी सप्लाई शुरू होती हैं क्षेत्र में जगह जगह पानी सड़क पर फैल जाता है
. जिससे किचड़ के साथ-साथ आवागमन भी प्रभावित होता हैं. सेमरी पैक्स अध्यक्ष मणिन्द्र नाथ तिवारी व शेख नवीहसन, अजय कुशवाहा , शेषनाथ प्रसाद, अब्दुल कुदृदूस का कहना है कि गर्मी का मौसम अपने चरम पर है. जब पानी की अधिक जरूरत पड़ती है तो बहुतेरे घरों को स्वच्छ जल नहीं मिल पाता है. जलमिनार से प्राप्त होने वाले पानी के प्रति लोगों में काफी उम्मीद थी. मगर विभाग उस उम्मीद को धरातल पर उतारने में कामयाब नही रहा है.

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