डंप है केंद्र का 21 करोड़, 68 योजनाएं अधूरीं

लापरवाही : सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम का मामला, मिलनेवाले बजट को खर्च करने में पिछड़े जिले के अफसरविकास के लिए बजट की कमी का रोना रोनेवाले अफसरों की कलई खुल रही है़ मौजूदा बजट ही जिले के अफसर खर्च नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में विकास की बात करना बेमानी सी लगती है़ मामला […]

लापरवाही : सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम का मामला, मिलनेवाले बजट को खर्च करने में पिछड़े जिले के अफसरविकास के लिए बजट की कमी का रोना रोनेवाले अफसरों की कलई खुल रही है़ मौजूदा बजट ही जिले के अफसर खर्च नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में विकास की बात करना बेमानी सी लगती है़ मामला सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम का है. यह पैसा अब अफसरों के लिए मुसीबत बन गया है़

बेतिया :विकास के लिए केंद्र सरकार की
ओर से मिले बजट को खर्च करने
में जिले के अफसर पिछड़ गये हैं.
हाल यह है कि केंद्र का करीब
21 करोड़ रुपये जिले में डंप
पड़ा है. इसमें से तीन करोड़
रुपये ऐसे हैं. जिसे अगस्त माह तक खर्च कर देना था, लेकिन खर्च
नहीं हो सका़ सात करोड़ रुपये
अधूरी पड़ी 68 योजनाओं की
दूसरी किश्त का है, जो पहली
किश्त खर्च नहीं होने के अभाव में
नहीं मिल पा रही है और करीब 11 करोड़ मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए अनुमोदित 47 योजनाओं का है, जिसका अभी प्रशासनिक स्वीकृति तक नहीं दिला सके हैं. इस योजना के तहत विकास संबंधी योजनाओं पर खर्च के लिए पूरी राशि केंद्र सरकार देती है़
बावजूद इसके बजट होते हुए भी इस कार्यक्रम के तहत मौजूदा समय में 18.89 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 68 योजनाएं अधूरी हैं. इसमें से 47 योजनाएं बीते वित्तीय वर्ष की है, जबकि 21 योजनाएं वर्ष 2010 से 2015 तक की है, जो अभी तक पूरी नहीं हो सकी है़
लापरवाही यूं है कि खर्च करने का लक्ष्य भी अफसर पूरा नहीं कर पा रहे हैं. नतीजा अगस्त माह तक जिले को वित्तीय वर्ष 2014-15 तक उपलब्ध बजट में से 2.51 करोड़ और 2015-16 के आवंटन के विरुद्ध 4.53 करोड़ अवशेष पड़ा है़ लापरवाही ही है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में 10.67 करोड़ की लागत से अनुमोदित 47 योजनाओं का अभी तक प्रशासनिक स्वीकृति भी नहीं मिल सका है, जिससे यह पैसा केंद्र से मांगा जा सके.
वर्ष अधूरीं योजनाएं
2010-11 04
2011-12 05
2012-13 02
2013-14 01
2014-15 10
2015-16 46
सात माह बीते, कोषागार से रुपये भी नहीं निकाले
जिले के विकास के लिए अफसर कितने सजग है, इसकी बानगी सीमा क्षेत्र विकास योजना है. इस योजना के तहत पैसा जिले में पड़ा हुआ है, बावजूद इसके योजनाएं अधूरी हैं. आलम यह है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष का सात बीत गया है, लेकिन कोषागार से एक भी रुपये की निकासी इन योजनाओं पर खर्च करने के लिए नहीं निकाली गयी है़
दो करोड़ व्यय करने का था लक्ष्य
सीमा क्षेत्र विकास योजना के तहत योजनाओं पर खर्च करने के लिए अगस्त माह तक दो करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य था, लेकिन एक भी रुपये खर्च नहीं किये गये हैं. इतना ही नहीं जून माह तक 5.99 लाख व्यय करने के लक्ष्य के सापेक्ष पांच करोड़ ही खर्च हुआ. इसमें भी 90 लाख अफसर नहीं खर्च कर पाये़

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